60 कुन्टल की जगह अब 72 कुन्टल के सट्टाधारक माने जायेगेंं छोटे कृषक

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बदायूँ। जिला गन्ना अधिकारी रामकिशन ने बताया कि प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त श्री संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा पेराई सत्र 2023-24 के लिए गन्ने के सट्टे एवं आपूर्ति नीति जारी कर दी गई है। गन्ना आपूर्ति नीति के आधार पर ही प्रदेश के गन्ना कृषकों को गन्ने की पर्चियां के निर्गमन सहित आपूर्ति हेतु विस्तृत निर्देश चीनी मिलों को दिये हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश की चीनी मिलों की पेराई क्षमता, गन्ना उत्पादन तथा चीनी मिलों को गन्ने की उपलब्धता में संतुलन बनाये जाने की आवश्यकता है, जिससे चीनी मिलों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप पेराई हेतु गन्ना उपलब्ध हो सके। इन्हीं सब तथ्यों का संज्ञान लेते हुए गन्ना विकास विभाग द्वारा जारी पेराई सत्र 2023-24 के लिये सट्टा एवं आपूर्ति नीति में कृषक हितों के दृष्टिगत कई बदलाव किये गये हैं, जिनमें मुख्य रूप से गन्ना कृषकों की बढ़ रही उपज के दृष्टिगत प्रति हेक्टेयर सट्टे की सीमा में सार्थक बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष समिति स्तरीय सट्टा प्रदर्शन के दौरान प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के उपरान्त अन्तिम कैलेण्डर स्मार्ट गन्ना किसान (ई.आर.पी.) की वेब साइट बंदमनचण्पद एवं मोबाईल ऐप म्.ळंददं पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों हेतु पोर्टल एवं मोबाईल ऐप पर अन्तिम कैलेण्डर का प्रदर्शन चीनी मिल चलने के एक सप्ताह पूर्व कर दिया जाएगा। कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के अन्तर्गत कृषकों के लिए सुलभ स्थान पर एक अतिरिक्त टर्मिनल लगा कर पूंछ-तांछ केन्द्र स्थापित किया जाएगा। इस वर्ष की आपूर्ति नीति में प्रति कृषक गन्ना सट्टे की सीमा सीमान्त कृषक (1 हेक्टेयर तक) के लिए अधिकतम 850 कु. से बढ़ाकर 900 कु., लघु कृषक (2 हेक्टेयर तक) के लिये 1,700 कु. से बढ़ाकर 1800 कु. तथा सामान्य कृषक (5 हेक्टेयर तक) के लिये 4,250 कु. से बढ़ाकर 4500 कु. की गई एवं उपज बढ़ोत्तरी की दशा में सट्टे की अधिकतम सीमा सीमान्त, लघु एवं सामान्य कृषक हेतु क्रमशः 1350 कु. से बढ़ाकर 1400 कु., 2,700 कु. से बढ़ाकर 2800 कु. तथा 6,750 कु. से बढ़ाकर 7000 कु. निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों की बहुप्रतीक्षित मांग पर सम्यक विचारोंपरान्त गन्ना आयुक्त ने छोटे किसानों को बड़ी राहत देते हुए अब 60 कुन्टल की जगह 72 कुन्टल तक के सट्टा धारक गन्ना किसानों को छोटे कृषक की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इससे इन सट्टा धारकों को 45 दिन के अन्दर गन्ना आपूर्ति की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की सट्टा आपूर्ति में भूमि क्रय-विक्रय के प्रकरणों में बेसिक कोटा हस्तान्तरण, ड्रिप विधि से सिंचाई करने वाले कृषकों को सट्टे में प्राथमिकता, सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों तथा उनके विधिक उत्तराधिकारियों को गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता, उत्तम गन्ना कृषकों को उपज बढ़ोत्तरी हेतु निःशुल्क प्रार्थना-पत्र देने की सुविधा एवं सट्टाधारक सदस्य कृषक की मृत्यु पेराई सत्र के दौरान होने पर सट्टा चालू रखे जाने सम्बन्धी अन्य प्राविधान भी प्रमुख हैं।

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उन्होंने बताया कि गन्ना विकास विभाग द्वारा आपूर्तिकर्ता कृषकों की अधिकतम गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए गत दो वर्ष, तीन वर्ष एवं पांच वर्ष की औसत गन्ना आपूर्ति में से अधिकतम औसत गन्ना आपूर्ति को पेराई सत्र 2023-24 के लिए बेसिक कोटा माने जाने के निर्देश दिये गये हैं। इससे न केवल कृषकों की गन्ना आपूर्ति में बढ़ोत्तरी होगी बल्कि चीनी मिलों को भी अधिक गन्ना प्राप्त हो सकेगा। उक्त के साथ ही जो कृषक पेराई सत्र 2022-23 में नये सदस्य बने हैं, तथा एक वर्ष ही गन्ना आपूर्ति किए हैं, उनके एक वर्ष की गन्ना आपूर्ति को ही बेसिक कोटा माना जायेगा। उन्होंने बताया कि गन्ना एवं चीनी आयुक्त द्वारा बताया गया कि ड्रिप इरीगेशन पद्वति अपनाने वाले कृषकों को उन्हें अतिरिक्त सट्टे में प्राथमिकता दी जाएगी तथा अतिरिक्त सट्टे में अस्वीकृत गन्ना प्रजातियों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। अतिरिक्त सट्टे हेतु किसी गन्ना कृषक से प्रशासनिक शुल्क के रूप में धनराशि की कटौती नहीं की जाएगी। ट्रेंच विधि से बुआई, सहफसली खेती एवं ड्रिप के प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करने वाले चयनित उत्तम गन्ना कृषकों से उपज बढोत्तरी के प्रार्थना-पत्र निःशुल्क प्राप्त किये जाएगें। आयुक्त ने बताया कि गन्ना कृषकों की मांग के चलते सट्टा नीति में यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि किसी सट्टाधारक सदस्य कृषक की मृत्यु पेराई सत्र के दौरान हो जाती है तो कृषक की आपूर्ति योग्य गन्ने की सामयिक खपत के दृष्टिगत उसका सट्टा चालू रखा जाएगा। सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके विधिक उत्तराधिकारियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर गन्ना आपूर्ति में 20 प्रतिशत की प्राथमिकता दी जाएगी। गन्ना आयुक्त ने बताया कि इस वर्ष की आपूर्ति नीति में पेराई सत्र के मध्य यदि किसी गन्ना आपूर्ति कृषक का डबल बान्ड(दोहरा सट्टा) प्रकाश में आता है, तो ऐसे प्रकरण को केन इम्प्लीमेन्टेशन कमेटी की बैठक में रखकर सम्बन्धित कृषक की गन्ना आपूर्ति/गन्ना मूल्य भुगतान पर रोक लगाये जाने की कार्यवाही की जायेगी। इस व्यवस्था के द्वारा गन्ना माफियाओं द्वारा बिचौलियों के माध्यम से फर्जी गन्ना कृषक बनाकर जो बड़े पैमाने पर अनुचित पर्चियां प्राप्त करके अनियमित आपूर्ति की जाती थी, वह अब संभव नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि कृषकों को शिकायत निवारण प्रणाली के अन्तर्गत उत्कृष्ट सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से मुख्यालय स्तर पर एक कन्ट्रोल रूम की व्यवस्था की गयी है जिसमें स्थापित टोल फ्री नम्बर 1800-121-3203 पर कृषक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज कराकर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। गन्ना विकास विभाग पेराई सत्र 2023-24 में चीनी मिलों को समय पर एवं सुचारू रूप से संचालित किये जाने हेतु समुचित व्यवस्था स्थापित कर रहा है, जिससे गन्ना कृषकों को पेराई सत्र के दौरान आने वाली असुविधाओं का सामना न करना पड़े। गन्ना आपूर्ति से संबंधित विभिन्न कार्यो की समय-सारणी के बारे में जानकारी देते हुए गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना समितियों के जो नये सदस्य 30 सितम्बर, 2023 तक बनाये जायेंगे, उन्हें आगामी सत्र में ही गन्ना आपूर्ति की सुविधा अनुमन्य होगी। कृषकवार, ग्रामवार सर्वे सट्टा सूचियों का प्रदर्शन 20 जुलाई से 30 अगस्त, 2023 तक किया जायेगा। प्री-कैलेण्डर का ऑनलाईन वितरण 01 सितम्बर, 2023 से 10 सितम्बर, 2023 तक किया जायेगा तथा समिति स्तरीय सट्टा प्रदर्शन 11 सितम्बर, 2023 से 30 सितम्बर, 2023 तक किया जायेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जारी सट्टा नीति से डिजिटलीकरण को और बढ़ावा मिलेगा। बिचौलियों का उन्मूलन होकर वास्तविक कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा तथा छोटे गन्ना कृषक अपना गन्ना समय से चीनी मिल को आपूर्ति कर सकेंगे एवं अस्वीकृत प्रजातियों के स्थान पर कृषक उन्नतिशील गन्ना प्रजातियों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

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