जेस्टेशनल हाइपरटेंशन क्या है

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प्रेग्नेंसी का समय हर कपल के लिए बेहद खास एक्सपीरियंस होता है। यह समय मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए ही बेहद नाजुक समय होता है, इसलिए इस दौरान खास ख्याल और सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंसी में महिलाएं कई तरह की चुनौतियों का सामना करती हैं, इसलिए नियमित जांच अहम होती है। आज वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे के मौके पर हम एक्सपर्ट की मदद से बता रहे हैं कि जेस्टेशनल हाइपरटेंशन क्या होता है और किस तरह की सावधानियां बरतने की जरूरत पड़ती है।

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प्रेग्नेंसी के दौरान हाइपरटेंशन क्या होता है?

प्रेग्नेंसी से जुड़ा हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर गर्भावस्था के 20 हफ्ते से शुरू हो सकता है और बच्चे के जन्म के बाद ही खत्म भी हो जाता है। ऐसा 6 से 8 फीसदी प्रेग्नेंसीज़ में देखा जाता है। इस दौरान होने वाले हाई ब्लड प्रेशर को जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहते हैं। गुरुग्राम के सीके बिरला अस्पताल के ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनोकॉलोजी में लीड कंसलटेंट, डॉ. आस्था दयाल ने बताया कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप गर्भावस्था की सबसे आम जटिलताओं में से एक है। अगर गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद किसी महिला का रक्तचाप मान 140/90 से ऊपर होता है, तो इसे जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है।

आम हाइपरटेंशन से यह कैसे अलग है?

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन दूसरे तरह के हाइपरटेंशन से इसलिए अलग है, क्योंकि यह प्रेग्नेंसी के आखिरी भाग में होता है और बच्चे के जन्म के साथ खत्म भी हो जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर हाई इसलिए होवने लगता है क्योंकि आपके दिल को रक्त को पम्प करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ने लगता है। इस दौरान भी हाई ब्लड प्रेशर के ऐसे लक्षण नहीं दिखते जिन पर आपका ध्यान जाए, इसलिए जरूरी है कि आप अपन सभी प्रीनेटल अपॉइंटमेंट पर जाएं, ताकि आपके डॉक्टर ब्लड प्रेशर की जांच भी कर सकें। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर का हाई होना कई तरह की जटिलताएं पैदा कर सकता है। आपके डॉक्टर अच्छे से भ्रूण की जांच करेंगे और ब्लड प्रेशर मैनेज करने में आपकी मदद करेंगे।

हाइपरटेंशन होता क्या है?

हाइपरटेंशन की स्थिति में रक्त आपकी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) की दीवारों पर लगातार सामान्य से अधिक जोर डालने लगता है। हाइपरटेंशन में ब्लड प्रेशर 90/140 या इसके ऊपर चला जाता है। ऐसे में शरीर की धमनियों में रक्त का दबाव बहुत बढ़ जाता है। अक्सर दिनभर में ब्लड प्रेशर कई बार बढ़ता और कम होता है, हालांकि, अगर लंबे समय तक यह हाई रहे, तो इससे सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचता है।

प्लेसेंटा कैसे विकसित होता है और कैसे काम करता है, इसको भी उच्च रक्तचाप प्रभावित कर सकता है। जिसका मतलब यह हुआ कि भ्रूण को सामान्य दर से बढ़ने के लिए आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल सकते हैं। अगर मां का ब्लड प्रेशर हाई ही रहता है तो इससे उसके और बच्चे दोनों के लिए लेबर से पहले, लेबर के दौरान और डिलिवरी के बाद जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान कितने तरह के हाइपरटेंशन हो सकते हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह के हाइपरटेंशन हो सकते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि इसकी शुरुआत कब हुई और किस तरह के लक्षण हैं। इस दौरान तीन तरह के हाई ब्लड प्रेशर आम हैं:

क्रॉनिक हाइपरटेंशन

प्रग्नेंसी से पहले या प्रेग्नेंसी की शुरुआत ( 20 हफ्ते से पहले) में हाई ब्लड प्रेशर होना। इस तरह का हाइपरटेंशन बच्चे के जन्म के बाद भी रहता है। जो लोग क्रॉनिक हाइपरटेंशन से पीड़ित होते हैं, उनमें प्रीक्लेम्पसिया भी विकसित हो सकता है।

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन

इस तरह का हाई ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंसी की लगभग अंत में होता है। कुछ लोग जो जेस्टेशनल हाइपरटेंशन से जूझते हैं उन्हें आगे चलकर प्रीक्लेम्पसिया भी हो जाता है। जेस्टेशनल हाइपरटेंशन होने पर अपने डॉक्टर से नियमित जांच जरूर करवाएं।

प्रीक्लेम्पसिया

यह स्थिति गर्भावस्था के दूसरे भाग में देखी जाती है, यानी आमतौर पर 27 सप्ताह के बाद। यह आपके लिवर, किडनी, फेफड़ों या दिमाग के साथ प्लेसेंटा को भी प्रभावित कर सकता है। फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के कार्डियोलॉजी निदेशक और एचओडी, डॉ. संजय कुमार के अनुसार, प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था में होने वाली उच्च रक्तचाप से जुड़ी एक अधिक गंभीर जटिलता है। इसमें पेशाब में प्रोटीन मौजूद होने के साथ प्लेटलेट काउंट कम होना, किडनी फंक्शन असामान्य होना, शरीर में सूजन और फेफड़ों में फ्लूएड का भरना, सिरदर्द, आंखों का कमजोर होना या सीज़र्स जैसे लक्षण दिखते हैं।

किन लोगों में बढ़ जाता है इसका खतरा?

डॉ. आस्था दयाल के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान इन लोगों में बढ़ जाता है हाई ब्लड प्रेशर का खतरा:

  • पहली प्रेग्नेंसी में आम है
  • खासकर 20 साल से कम उम्र या फिर 40 वर्ष से अधिक उम्र में
  • मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में ज्यादा जोखिम
  • जुड़वां, ट्रिप्लेट्स या इससे ज्यादा बच्चे होने पर
  • पिछली गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप या फिर प्रीक्लेम्पसिया का इतिहास रहा हो
  • परिवार में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का इतिहास रहा हो
  • डायबिटीज या फिर जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर
  • इम्यून सिस्टम से जुड़ा डिसऑर्डर, जैसे ल्यूपस
  • किडनी की बीमारी होने पर

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन होने पर क्या करना चाहिए?

डॉ. दयाल के मुताबिक, जेस्टेशनल हाइपरटेंशन वाली महिलाओं को व्यायाम, टहलना, आराम करने की तकनीक, स्वस्थ आहार जारी रखना चाहिए जैसा सभी गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है। साथ ही अपने रक्तचाप, यूरिन प्रोटीन, किडनी और लिवर फंक्शन और बच्चे के विकास के लिए अल्ट्रासाउंड की बारीकी से निगरानी की आवश्यकता होती है।

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