बिना मां के बच्चों में अच्छे संस्कार होना असंभव: डॉ दीप्ति भारद्वाज

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बदायूँ । बदायूँ क्लब में मातृ शक्ति सम्मेलन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें नगर के अभिभावक माताओं ने सहभाग किया, कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. दीप्ती भारद्वाज एवं वक्ता के रूप में शिवम्बदा ने किया, कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती वन्दना से हुआ।

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मुख्य वक्ता डॉ दीप्ति भारद्वाज ने कहा बालिका शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्ता पर बल दिया एवं वर्तमान समय में बालक-बालिकाओं में संस्कारों की कमी पर चिन्ता प्रकट की हमारे स्वतंत्रता संग्राम में इस देश के महान वीरों ने किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी अपने राष्ट्र के लिये अपना सर्वस्व न्योक्षावर कर दिया। हम सबका यह कर्तव्य है कि हम अपने वीरों के बलिदान को व्यर्थ न जाने दे और अपने निरन्तर प्रयासों से भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित करें।

नारी के अंदर अपार शक्ति है आए दिन हमें नारी सशक्तिकरण उदारण देखने मिले हैं। महिला हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं, यहां तक कि देश की सुरक्षा में महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं हमें ऐसी मिलाओं से प्रेरणा लेकर आगे बढना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिए जाते हैं शिशुमंदिर में पढ़ने वाले छात्र कभी संस्कार नहीं भूलते आधारभूत विषयों जोर देने की बात कही, शिक्षा नीति सरल होना चाहिए खेल-खेल में पढ़ाना चाहिए, क्योंकि दवाब डालकर बच्चों के पढ़ाने से उनके मष्तिस्क पर बुरा असर पड़ता है।

वक्ता के रूप में शामिल हुई शिवम्बदा ने कहा कि छात्राओं को केवल शिक्षा नहीं वरन संस्कारवान शिक्षा देना नितान्त आवश्यक है उन्होंने माताओं से आवाहन किया कि यदि आप निश्चय कर लें तो निश्चित रूप से शिवा जी, लक्ष्मीबाई के समान सन्तानों का निर्माण कर सकती हैं उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के 75वें वर्ष का यह अमृत महोत्सव हम सबको प्रेरणा है कि हम स्वाधीनता संग्राम अपने नायकों प्रति श्रद्धा सुमन समर्पित कर उनके स्वपनों के भारत के निर्माण के लिये संघर्ष करें।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ गार्गी बुलबुल ने कहा विद्यालय सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है घर पर माताएं अपने बच्चों के पठन पाठन पर ध्यान दें इससे बच्चों का उत्तरोत्तर विकास होगा। उन्होंने कहा कि मां की बच्चे की प्रथम शिक्षिका होती है माता के दिए गए संस्कार बच्चों के जीवन को बेहतर बनाते हैं ऐसे में बच्चों के सर्वांगीण विकास में मां का विशेष योगदान होता है।

कार्यक्रम सयोंजक सीमा रानी ने कहा कई बार छात्र छात्राएं अपनी समस्याएं विद्यालय में नहीं कह पाते हैं लेकिन वह अपनी मां से जरूर बताते हैं माताएं बच्चों के मनोभाव को बारीकी से समझ कर उसका निस्तारण करा सकती हैं साथ ही उन्होंने अन्य क्रिया कलापों के बारे में जानकारी दी साथ ही उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालिका सीमा चौहान, कमलेश, जिला समन्वयिका किरण सिंह सपना सिंह आदि उपस्थित रही।

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