वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव को मिला प्रथम ‘गीत गुलमोहर सम्मान-2026, अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

WhatsApp Image 2026-09-07 at 6.37.56 PM
WhatsAppImage2026-02-15at42216PM1
previous arrow
next arrow

बदायूँ। साहित्य, संस्कृति और कला को समर्पित आचमन फाउंडेशन के तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े एवं डॉ. उर्मिलेश जन्म जयंती वर्ष को समर्पित ‘गीत गुलमोहर गीत निशा’ का आयोजन किया गया। साहित्य और गीत की संवेदनाओं से सराबोर इस आयोजन में मैनपुरी के किशनी से पधारे वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव को प्रथम ‘गीत गुलमोहर सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण हृदेश कठेरिया ने वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनकी सहधर्मिणी शशि श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं, जिन्हें आचमन फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की संकल्पना गीत के प्रति निष्ठा, प्रेम और समर्पण को जीवन में सर्वोपरि मानने की भावना पर आधारित रही। सम्मान समारोह के दौरान आचमन फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. सोनरूपा विशाल ने पुष्प-प्रेम की इसी संकल्पना को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव को उपहार स्वरूप मधुमालती की एक बेल भेंट की। उन्होंने कहा कि यह बेल उनके प्रांगण में पुष्पित-पल्लवित होगी और ‘गीत गुलमोहर’ आयोजन की स्मृतियों को लंबे समय तक जीवंत रखने के साथ ही इस आयोजन की मूल भावना को भी सार्थक करेगी।
वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार नरेंद्र गरल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का संचालन डॉ. उपदेश शंखधार ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हृदेश कठेरिया द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद डॉ. उपदेश शंखधार ने वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित आलेख प्रस्तुत किया। आलेख के माध्यम से उनके साहित्यिक जीवन, गीत-साधना और रचनात्मक योगदान को रेखांकित किया गया।
इसके बाद शुरू हुई ‘गीत निशा’ ने कार्यक्रम को पूरी तरह गीतमय बना दिया। वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव ने अपने मुक्तकों और गीतों की प्रस्तुति से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके लोकप्रिय एवं हस्ताक्षर गीतों की श्रोताओं ने विशेष रूप से मांग की। गीत की संवेदना, शुचिता और उसकी सामाजिक भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा—
“गीत संवेदनाओं का पावन पवन
हो न जाए प्रदूषित, ये संकल्पना।
सत्य, शिव, सुंदरम को समेटे हुए
क्रौंच की आह की सर्जना-अर्चना।
बुझ न जाए कहीं गीत का ये दिया,
वरना उपवन ही श्मशान हो जाएगा।
चुटकुलों को अगर हमने कविता कहा,
गीत का गाँव वीरान हो जाएगा।”
उन्होंने गीत की चिरंतनता और अपनी गीत-यात्रा को स्वर देते हुए कहा—
“फूल खुशबू को बिखेरे जब तलक,
भ्रमर कलियों पे डेरे जब तलक।
जब तलक पंछी उड़े आकाश में,
जब तलक भी मद रहे मधुमास में।
तब तलक सुर के सफर में
रागिनी गाती रहे,
गीत की यह चाँदनी आती रहे।”
उनकी प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों से गूंजता रहा। श्रोताओं ने उनके गीतों की संवेदना, भाषा और भाव-प्रवाह की सराहना की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र गरल ने भी अपने अनेक प्रसिद्ध गीतों की प्रस्तुति से साहित्यप्रेमियों को भावविभोर किया। उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिबद्धता और गीत की प्रभावशीलता को अभिव्यक्त करते हुए कहा—
“लिए शाकल्य बैठे हैं, हवन करके दिखा देंगे,
कथाएँ वेदनाओं की श्रवण करके दिखा देंगे।”
गीत के प्रति निष्ठा और अच्छी कविता के सामने आए संकट के दौर में विशुद्ध गीतों से सजी यह साहित्यिक शाम लंबे समय तक याद की जाएगी। कार्यक्रम में बिल्सी से पधारे सुबीन माहेश्वरी, डॉ. अक्षय अशेष एवं डॉ. उपदेश शंखधार ने भी काव्य पाठ कर अपनी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही बटोरी।
भीषण बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमियों की मौजूदगी ने आयोजन के प्रति उनके उत्साह को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में गोपाल कृष्ण मिश्र, डॉ. गीतम सिंह, सुबीन माहेश्वरी, भारतेंद्र मिश्र, प्रदीप शर्मा, मधु शर्मा, सुषमा भट्टाचार्य, अमोल पाराशर, माला पाराशर, श्रीमती मंजुल शंखधार, डॉ. कमला माहेश्वरी, डॉ. मधु गौतम, संजय आर्य, अंजली शर्मा, प्रतिभा मिश्रा, गायत्री प्रेरदर्शिनी, कुमार आशीष, रवींद्र मोहन सक्सेना एवं प्रतीश गुप्ता सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक एवं आचमन फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. सोनरूपा विशाल ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सह-संयोजक एवं व्यवस्थापक विशाल रस्तोगी ने भविष्य में भी इसी प्रकार की साहित्यिक गोष्ठियों एवं आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई तथा सभी से सहयोग एवं सहभागिता की अपेक्षा की। बारिश के बीच आयोजित यह गीत निशा साहित्य, संवेदना और संस्कृति के प्रति समर्पण की एक यादगार शाम बनकर सामने आई।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-12-28at122820
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at122213
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights