मुमुक्षु शिक्षा संकुल में हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम और कवि सम्मेलन
शाहजहांपुर।अमृत महोत्सव के अंतर्गत आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम मुमुक्षु आश्रम की पांचों शिक्षा संस्थाओं ने मिलकर धूमधाम से मनाया। प्रातः 8:00 बजे ध्वजारोहण के बाद विशाल तिरंगा रैली बरेली मोड़ से गांधी उद्यान तक निकाली गई। जिसमें 1500 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। रैली को स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली की वापसी पर स्वामी शुकदेवानंद सभागार में एस0एस0 लॉ कॉलेज और एस0एस0 (पीजी) कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें संस्कृत महाविद्यालय, धर्मानंद इंटर कॉलेज, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि के बाद डॉ0 प्रतिभा सक्सेना द्वारा गाए गए झंडा गीत “विजय विश्व तिरंगा प्यारा” से हुआ। इसके बाद लॉ कॉलेज के वंशदीप ने बांसुरी पर “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” गीत की धुन सुना कर दर्शकों का मन मोह लिया। श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ की शगुन कुशवाहा ने “ए वतन मेरे आबाद रहे तू”, डी0एस0 इंटर कॉलेज के अंशुल कुमार ने “हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं।”, एसएस कॉलेज की प्रिंसी सिंह ने ” स्वर्ग से सुंदर देश हमारा” गीत सुनाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

एसएस कॉलेज की श्रद्धा, प्रार्थना आदि छात्राओं ने जय हो गीत पर समूह नृत्य, श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ कि अंशिका शर्मा, शगुन, नंदिनी आदि ने “ओ देश मेरे” गीत पर समूह नृत्य प्रस्तुत कर के छात्र छात्राओं को देशभक्ति से भावविभोर कर दिया।
एसएस कॉलेज के अंकित सिंह तथा साथियों ने मनमोहक कव्वाली “ए मेरे वतन” प्रस्तुत की। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया जिसमें छात्र कवियों, एसएस लॉ कॉलेज के शेवांग कुमार, गौरव पटेल और वैभव पाठक के अलावा डॉ0 इंदु अजनबी, रामबाबू शुक्ला, अरविंद पंडित तथा डॉ0 शिशिर शुक्ला ने अपनी रचनाएं सुनाकर युवाओं में जोश भर दिया। रामबाबू शुक्ला की पंक्तियां,” देख अन्याय चुप रहना मेरी आदत नहीं है, मौत के भय से घबराना मेरी आदत नहीं है, लेखनी झुक नहीं सकती भले ही हाथ कट जाए , झूठ को सत्य लिखपाना मेरी आदत नहीं है।” दर्शकों को बहुत पसंद की गई । अरविंद पंडित की पंक्तियों,” बहते दरिया से जिसमें ना रही रवानी है, कब भला दुनिया ये उसकी रही दीवानी है। वतन के वास्ते जो मिटने को तैयार नहीं , उसको धिक्कार है ऐसी भी क्या जवानी है” ने युवाओं में जोश भर दिया। डा शिशिर शुक्ला ने आतंकवाद पर आघात करते हुए कहा, “ली शपथ यही है इस देश से हम आतंक भगाएंगे, एक शीश के बदले सौ सौ शीश काट कर लाएंगे । एक लाल भारत मां का सौ सौ दुश्मन पर है भारी, आंच वतन पर आई तो फिर लहू बनेगा चिंगारी ” डा इंदू अजनबी की पंक्तियां,














































































