बरेली में है मंडल का एकमात्र ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’का स्वर्ण जयंती समारोह रविवार 12 जून 2022 को होगा : निर्भय सक्सेना

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बरेली। प्रत्येक आस्थावान व्यक्ति की यह कामना होती है कि वह कम से कम एक बार भगवान ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ महाराज के दर्शन करके अपने मानव जीवन को धन्य कर लें। दक्षिण भारत में तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थापित भगवान भगवान विष्णु के अवतार भगवान ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ को कलियुग में साक्षात वैकुण्ठ माना जाता है। पर महंगी व कष्टसाध्य यात्रा होने के कारण अधिकांश परिवार कलियुग के वैकुण्ठ का दर्शन पूजन करने से वंचित रह जाते हैं ।

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उनकी आस्था में आने वाली इस कभी को पूर्ण करने के लिए बरेली के राजेन्द्रनगर के पटेल नगर क्षेत्र में लगभग 52 वर्ष पूर्व ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ की स्थापना की गयी थी जो मंडल का एकमात्र मंदिर है। बरेली के इस वेंकटेश्वर मंदिर में दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत नमूने के रूप में विख्यात पटेलनगर स्थित ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ का स्वर्ण जयंती वार्षिकोत्सव रविवार 12 जून को है। हर वर्ष भगवान वेंकटेश्वर मंदिर का जून माह में प्रतिवर्ष परम्परागत ढंग से धूमधाम से मनाया जाता है। कोविडकाल में जरूर यह अपवाद रहा पर कोविडकाल में नियमो का पालन कर संक्षिप्त कार्यक्रम हुआ। मंदिर से जुड़े शंकर दास एवम निर्भय सक्सेना के अनुसार इस बार स्वर्ण जयंती उत्सव रविवार 12 जून 2022 को वार्षिक पूजन हवन एवम शाम को मंदिर परिसर में पालकी यात्रा निकाली जाएगी। बरेली में बने इस ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ का उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल जी. सी. रेड्डी ने 15 अप्रैल 1970 को उद्घाटन किया था।

इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सभी पूजा अर्चना आंध्र प्रदेश में स्थापित मुख्य देव स्थान के अनुसार दक्षिण भारतीय ढंग से पुजारियों के द्वारा ही सम्पन्न करायी जाती है। दक्षिण भारतीय लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए आई. वी. आर. आई. कर्मियों ने वर्ष 1969 में ‘तिरूपति वेंकटेश्वर बाला जी निर्माण समिति’ बनायी थी। 24 फिट लंबे गुणा 12 फिट चौडे स्थान में भगवान वेंकटेश्वर का फोटो रख कर पूजा शुरू हुई थी। बाद में इस कमेटी में मुख्य रूप से डा. एम.एस. शास्त्री, वैज्ञानिक डा. सदागोपालन, डा. जे. आर. राव, पूर्व एम. एल. सी. डा. ए पी सिंह, एम.आर. लघाटे, शंकर दास, निर्भय सक्सेना आदि को शामिल किया गया था। वर्ष 1977 में मंदिर के साथ ही ‘मालती दलाल मंडपम’ का निर्माण कराया गया। यहां तमिलनाडु के महावलीपुरम से काले ग्रेनाइट की भगवान वेंकटेश्वर की आदमकद मूर्ति लाकर विधि विधान से स्थापित हुई। दूर से ही लाल रंग के मंडपम वाले इस वेंकटेश्वर मंदिर की छटा देखते ही बनती है। स्थापत्य की दृष्टि से भी इसमें वास्तु शास्त्र का भी ध्यान रखा गया है। भगवान वेंकटेश्वर की विशाल मूर्ति के दर्शन से भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है। मंदिर के दरवाजे पर ही तिलक, शंख, चक्र उत्र्कीण किये गये हैं बाद में मंडप के दायीं ओर गणेश जी और वायीं ओर अंडाल देवी, अन्नपूर्णा देवी की स्थापना की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में पदमावती देवी, वजरंग बली, भगवान शंकर, दुर्गा माता, राधा कृष्ण के मंदिरों के साथ ही शनिदेव महाराजा एवं तुलसी का स्थल भी बनाया गया। मुख्य मंदिर और परिसर में अन्य मंदिरों का वास्तुशिल्प दक्षिण शैली का ही है और मंदिर के गेट पर दक्षिण भारत की परंपरा के अनुसार एक विशाल गोपुरम् भी बनाया गया है।

मंदिर का संचालन कैम्फर का मालती दलाल ट्रस्ट करता है। ट्रस्टी डाॅ. ए. पी. सिंह के अनुसार मंदिर परिसर में शीघ्र ही अन्य कार्य कराने की भी योजना है। मंदिर के पूर्व में एन डी तिवारी पुजारी रहे थे जिनकी मृत्यु हो गई। अब मंदिर में पुजारी मध्यम कुमार है। इस बार कोविड काल के बाद स्वर्ण जयंती उत्सव रविवार 12 जून 2022 को 52 वा वार्षिक पूजन सुबह 6 बजे से प्रारंभ होगा। हवन सुबह 11बजे एवम पाली यात्रा सायं 6.30 बजे से प्रारंभ होगी।

कलम बरेली से साभार — निर्भय सक्सेना, पत्रकार बरेली मोबाइल 9411005249 8077710362

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