बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव दिधौनी में पिछले आठ दिनों से चल रही श्रीमदभागवत कथा का बीती गुरुवार की शाम धूमधाम से समापन हो गया। जिसके बाद यहां विशाल भंडारा आयोजित किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इससे पहले कथावाचक ने भक्तों का प्रसाद का महत्व समझाया। एटा जिले के गंजडुंडवारा से पधारी ममता शाक्य ने जिस स्थान पर भागवत कथा का श्रवण होता है वहां वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध हो जाता है। साथ ही वहां के व्यक्तियों में आत्मिक बल की वृध्दि हो जाती है। उन्होने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन करते हुए कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। प्रसाद का कभी भी अपमान नहीं करना चाहिए। इससे भगवान का अपमान होता है। इस मौके पर रामप्रकाश सिंह, कृष्णमुरारी, देवपाल, राधेश्याम, विवेक कुमार सिंह, लोकपाल शाक्य, रामगोपाल शाक्य, सुरेंद्र प्रजापति, मोहनलाल, संजीव कुमार, विनोद कुमार, नेम कुमार, मुन्नालाल, लीलाधर, यशपाल, सुमित शर्मा, नैना देवी, कोमल, प्रियांशी देवी, निकिता, अंशू देवी, ज्योति रानी आदि का विशेष सहयोग रहा।