बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव पिन्डौल में जनता आदर्श श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रही रामलीला में बीती रात राम वनवास, भरत मिलाप का मंचन हुआ। राजा दशरथ ने अपने कुल के गुरु वरिष्ठ एवं मन्त्रियों से विचार विमर्श के बाद निर्णय लिया कि कल सुबह श्री राम का राजतिलक होगा। पूरी अयोध्या नगरी को सजाया गया लेकिन यह निर्णय देवताओं को अच्छा न लगा। उन्होने सरस्वती की आराधना कर मन्थरा की जीव पर बैठ गयी और कैकयी को मन्थरा द्वारा उकसाया गया कि तुम राजा से अपने पुराने दो वरदान मांग लो। भरत को राज्य और राम को चौदह वर्ष वनवास। जैसे ही यह ही प्रस्ताव कैकयी ने दशरथ के समक्ष रखा राजा राम की सौगन्ध ले चुके थे। त्रिया हट के कारण कैकयी के सामने नत मस्तक हो गए। जब यह समाचार अयोध्यावासियों ने सुना सभी दुखी हो गए। सुमन्त को बुलाकर राम को वन मे भेज दिया। राम की केवट से नाव लेकर दूसरी पार उतर आए और पंचवटी में जा कर ठहर गए। इधर सुमन्त जी खाली रथ लेकर महल में वापिस आ गए। राजा दशरथ ने राम को न देखकर उनके वियोग मे प्राण त्याग दिए। भरत शत्रुध्न को ननिहाल से बुलाया गया और दशरथ का अन्तिम संस्कार कराया गया। अयोध्या वासियों सहित भरत अपने भाई से मिलने पहुँचे। भरत के आग्रह करने पर भी जब राम लौटने को राजी नही हुए तब उनकी खडाऊँ लेकर अयोध्या वापिस आ गए। केवट संवाद भरत मिलाप ने लोगो को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस मौके पर आदर्श रामलीला कमेटी के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे।