पाँच साल की बेटी उम्मेजिया ने क़ुरान का पाठ पूरा कर कस्बा का नाम रोशन किया

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बदायूं। जिले के कस्बा ककराला निवासी पाँच साल की बेटी उम्मेजिया ने क़ुरान का पाठ पूरा कर कस्बा का नाम रोशन किया है।
कस्बा के वार्ड नम्बर बीस निवासी उम्मे जिया रहमानी पुत्री डॉक्टर सर्वे अली खाँ रहमानी ने पाँच वर्ष की उम्र में क़ुरान शरीफ़ का पाठ पूरा किया। बच्ची के परिवार वालों ने एवं कस्बा वासियों ने क़ुरान का पाठ पूरा होने पर ख़ुशी ज़ाहिर की और उनकी शिक्षिका अथवा इल्म देनी बाली अख़्तरी बेगम को मुबारकबाद दी। शिक्षिका ने बताया कि उम्मेजिया अन्य विषयों में भी पड़ने में बहुत तेज है। इस्लाम धर्म की पवित्र किताब क़ुरान मजीद का मुसलमानो में विशेष महत्व है। क़ुरान शरीफ़ को उसकी मूल भाषा में पढ़ने के लिए अरबी भाषा पढ़ना सीखना अनिवार्य है। इसके लिए बच्चे छोटी से उम्र में ही क़ुरान को पढ़ने के लिए पहले अरबी भाषा सीखते हैं उसके बाद क़ुरान शरीफ का पाठ करते हैं। उम्में जिया रहमानी ने मात्र पाँच वर्ष छः माह अरबी भाषा पढ़ना सीखकर क़ुरान का पाठ पूरा करके एक मिसाल क़ायम की है। शिक्षिका अख़तरी बेगम तीस वर्षों से बच्चों को क़ुरान शरीफ़ की शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों का क़ुरान शरीफ़ का पाठ पूरा हो पाता है तब उनकी उम्र तक़रीबन दस से पंद्रह वर्ष होती है। उम्मे जिया रहमानी का दिमाग़ बहुत तेज है एक बार में ही वो सीख जाती है यही वजह है कि इतनी कम उम्र में उसने क़ुरान का पाठ पूरा कर लिया। शिक्षिका के पति वरिष्ठ पत्रकार हामिद अली खाँ राजपूत ने बच्ची को मुबारकबाद देते हुए कहा इससे और बच्चों को प्रेरणा मिलेगी।

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