मदर एथीना स्कूल की ‘‘साप्ताहिक कार्यशाला’’ मेें नई तकनीकों के माध्यम से विशेष शिक्षण व्यवस्था

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बदायूं।मदर एथीना स्कूल में विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि हेतु प्रारंभ की गई साप्ताहिक कार्यशाला के अंतर्गत प्रथम दिवस के अवसर पर विभिन्न कक्षाओं में विषयाध्यापकों द्वारा नई-नई विधाओं एवं प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षण प्रदान किया गया। जिसके अंतर्गत अंग्रेजी विषय में नीमा नागरथ द्वारा लघु नाटिका व खेल क्रियाओं के माध्यम से क्रियाओं के ज्ञान, विज्ञान में खुशबू दीवान द्वारा चार्ट एवं पी0पी0टी0 के माध्यम से जीवन में भोजन की आवश्यकता, महŸव, स्त्रोत तथा उसको बर्बाद न करने के विषय में बताया गया साथ ही खुर्शीद बानो के द्वारा विभिन्न फसलों के पौधों के नमूनों के माध्यम से रवी और खरीफ के फसलों की विशेष जानकारी के साथ-साथ उनके पैदावार के समय तथा मूलभूत आवश्यक वातावरण की जानकारी प्रदान की। श्वेता जौहरी द्वारा संतुलित आहार का चार्ट बनवाकर उसके लाभ के विषय में बताया गया तथा स्क्रैप बुक के पेज, पेपर कप आदि के माध्यम से पेड़ बनवाकर उनके मुख्य स्त्रोतों की जानकारी प्रदान की। शिक्षिका ज्योति द्वारा विद्यार्थियों को प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी और उनके संरक्षण के विषय में सजीव उदाहरणों के माध्यमों से बताया गया।

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गणित विषय को सरलता से समझाने के लिए गणित के अध्यापक नितिन शर्मा द्वारा विभिन्न खेल, क्रियाओं व मॉडल्स से शिक्षा प्रदान की गई। प्राइमरी विद्यार्थियों ने समीर उल्लाह खान के साथ कम्प्यूटर लैब में जाकर हार्डवेयर व बेसिक कम्प्यूटर शिक्षा का ज्ञान अर्जित किया। शिक्षण के इस सरल, मौज-मस्ती व ज्ञान से भरपूर माहौल में विद्यार्थियों ने हर्षोल्लास व पूर्ण रूचि के साथ प्रतिभाग किया। प्रथम दिवस के अंत में हेड मिर्स्टेस व प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों से दिनभर में प्राप्त की गई जानकारी का परीक्षण भी किया। मिनिमम लर्निंग की ‘‘साप्ताहिक कार्यशाला’’ में अधिक संख्या में विद्यार्थियों का प्रतिभाग कराकर अभिभावकों ने भी विद्यालय का सहयोग किया।
विद्यालय की निदेशिका चयनिका सारस्वत ने बताया कि विद्यार्थी को कक्षा-कक्ष शिक्षण के दौरान न केवल पुस्तकीय ज्ञान वरन् विभिन्न अनुप्रयोगों तथा सजीव चित्रण व उदाहरणों के माध्यम से ज्ञान प्रदान करने से उनकी तार्किक शक्ति में वृद्धि होती है और ऐसा शिक्षण मनुष्य के जीवन में अपनी अमिट छाप छोड़ता है। अतः शिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु हम सदैव जीवन विधाओं और कलाओं का प्रयोग करते रहते हैं जिससे विद्यार्थियों में ज्ञान की वृद्धि हो और वह उत्कृष्ट परिणाम दे सकें।

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