अवशेष न जलाएं कृषक: राज्यमंत्री
बदायूं। आत्मा योजना के अन्तर्गत एवं प्रमोशन आफ इन सीटू योजना के अन्तर्गत गोष्ठी का आयोजन ग्राम पस्तौर माफी विकासखण्ड सलारपुर में महेश चन्द्र गुप्ता मन्त्री नगर विकास , उ0प्र0 शासन की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिसमें फसल अवशेष न जलाने के सम्बन्ध में कृषकों को उप कृषि निदेशक डा0 रामवीर कटारा द्वारा विस्तार से अवगत कराया गया उनके द्वारा बताया गया कि धान व गेहूँ की फसलों की कम्बाईन से कटाई करने के बाद बचे फसल अवशेषों को अधिकांश क्षेत्रों में कृषक भाईयों द्वारा जलाया जा रहा है जिसके कारण वातावरण दूषित होने के साथ-साथ मिट्टी की पोषक तत्वों में अत्यधिक क्षति होती है साथ ही मिट्टी की भौतिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न हानिकारक गैसे यथा (कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्राहड आक्साइड) निकलती हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिये खतरा है इससे लोगों को सास की तकलीफ, आखों में जलन तथा चमडी के रोग के साथ-02 हदय व फेफडों के रोग हो जाते हैं।
एक टन धान के अवशेष जलाने से 3.00 कि0ग्रा0 कणिका तत्व, 60 कि0ग्रा0 मोनो आक्साइड, 1460 कि0ग्रा0 कार्बन डाई आक्साइड, 199 कि0ग्रा0 राख एवं 02 कि0ग्रा0 सल्फर डाई आक्साइड पैदा होती है साथ ही उक्त मात्रा से ही धान जलाने पर लगभग 5.5 कि0ग्रा0 नाइट्रोजन, 23 कि0ग्रा0 फास्फोरस तथा 25 कि0ग्रा0 पोटाश, 1.2 कि0ग्रा0 सल्फर तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट होने के साथ 400 कि0ग्रा0 कार्बन की क्षति होती है। पोषक तत्वों के नष्ट होने के अतिरिक्त मिटटी के कुछ गुण जैसे भूमि तापमान, पी0एच0, नमी, उपलब्ध फास्फोरस एवं जैविक पदार्थ भी अत्यधिक प्रभावित होते हैं। मा0 नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन0जी0टी0) की ओर से गेहूँ , धान एवं गन्ना आदि के फसल अवशेष जलाने पर रोक है साथ ही प्रति हैक्टेयर अर्थदण्ड का भी निम्न विवरण के अनुसार धारा -24 एवं 26 के अन्तर्गत दण्ड का प्राविधान है।
1-02 एकड से कम क्षेत्र के लिये रू0-2500/- प्रति घटना।
2-02 एकड से 05 एकड क्षेत्र के लिये रू0-5000/- प्रति घटना।
3-05 एकड से अधिक क्षेत्र के लिये रू0-15000/- प्रति घटना
इन फसल अवशेषों को न जलाने व खेत में विभिन्न कृषि यंत्र जैसे हैप्पी सीडर, स्ट्रा चापर, मल्चर, रोटरी स्लेसर, रिवर्सवुल मोल्ड वोर्ड प्लाऊ, रोटावेटर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम टू बी अटैच विद कम्वाईन द्वारा फसल अवशेषों को मिटटी में मिलाया जा सकता है। साथ ही पानी लगाते समय 2.5 कि0ग्रा0 प्रमि हैक्टेयर से यूरिया का छिडकाव करें। उक्त समस्त कृषि यन्त्रों पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकमत 35000 से लेकर 90000 तक का अनुदान कृषि विभाग में उपलब्ध है। गोष्ठी में सैकडों की संख्या मंे कृषक उपस्थित , सोबरन सिंह, कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।














































































