फायर स्टेशन के जर्जर भवन में कर्मचारी नरकीय जीवन जीने को मजबूर
सहसवान । फायर स्टेशन के जर्जर भवन में कर्मचारी नरकीय जीवन जीने को मजबूर फायर स्टेशन आवास लगातार जर्जर हो रहे हैं। कुछ गिरायूू हालत में है।

प्रशासन द्वारा नगर से बाहर दिल्ली मेरठ राजमार्ग पर करीब सेतीस साल पूर्व [सन 1985] मे फायर वाहनों को सुरक्षित खड़ा करने तथा फायरमैंनों को रहने के लिए जिस फायर स्टेशन का निर्माण कार्य करवाया गया था वह अब पूरी तरह जर्जर हालत मे है। फायर स्टेशन आवासों की बनी हुई छते जहां टूट रही है वहीं दीवालें भी जाबाब देने लगी है । फायर स्टेशन की स्थिति खराब होने लगी है । और वहां रहने वाले कर्मचारी भय के साए में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बरसात के चलते आवासों की छतें टपकने लगी है । कमरों मे बारिश का पानी छत से टपकता रहता है । ज्यादा स्थिति खराब होने पर स्टेशन कर्मचारियों ने आवासों की छतों को पन्नी से ढक दिया है तेज हवाओं के चलते पन्नी उड जाती है । फायर कर्मचारियों ने बताया कि बाउंड्रीबाल न होने के चलते जहरीले जानवर साँप ,बिच्छू ,बिशकबरे आदि आवासों मे घुस आते है जिससे जान का खतरा बना रहता है । कुछ कर्मचारियों ने स्टेशन परिसर मे ही झोंपडी डालकर अस्थाई आवास बना लिए है । तेज हवा चलने और बारिश होने पर किसी अनहोनी के चलते कर्मचारी ऐसी स्थिति में आवासों से बाहर निकल जाते हैं। छत का पलास्टर टूट जाने के कारण बारिश होने पर स्टेशन के अंदर जहां पानी भर जाता है । जिससे कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है । पूरनलाल सोलंकी ने सुरक्षित और सुव्यवस्थित फायर स्टेशन बनाए जाने की मांग की उनका कहना था कि इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है । भवन अधिक पुराना होने की वजह से जर्जर और अव्यवस्था का शिकार होता जा रहा है। यही हालात रहे तो आने वाले समय में अपनी सेवाएं देने में यह स्टेशन नाकाम साबित हो जाएगा। एक कार्यालय और बारह कर्मचारियों के आवास है । इस संबंध में अग्निशमन अधिकारी पूरन लाल सोलंकी ने बताया कि जर्जर भवन के कारण हादसे की आशंका रहती है। नए भवन के संबंध में शासन को पत्र भेजा है। अग्निशमन उपकरण हो रहे खराब उन्होने जल्द ही भवन निर्माण की उम्मीद जताई है ।














































































