संतोष सिंह तिराहे से पटेल नगर तक मनाया गया राधा रानी का जन्मोत्सव, महिलाओं का सम्मान और बच्चों ने पेश किए मनमोहक नृत्य
बदायूं। राधा रानी के जन्मोत्सव राधाष्टमी के पावन पर्व पर नगर में विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। संतोष सिंह तिराहे स्थित मंदिर में मंदिर व्यवस्थापक एवं समाजसेवी जितेंद्र सिंह राठौर एवं ओमप्रकाश शर्मा के आमंत्रण पर जिला संयोजिका मातृशक्ति डॉ. प्रतिभा गुप्ता नोटरी अधिवक्ता ने मातृशक्ति की बहनों के साथ भंडारे में सहभागिता की। इस अवसर पर पूर्व एमएलसी एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जितेंद्र यादव की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके पश्चात गन्ना दफ्तर के पीछे पटेल नगर बस्ती स्थित मंदिर में विभाग सहसंयोजिका श्रीमती महेशा सिंह के आयोजन में राधाष्टमी उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा गुप्ता ने सहभागिता करते हुए राधा रानी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राधा रानी का जीवन प्रेम, त्याग, समर्पण और भक्ति की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर समाज में सेवा, सद्भाव और संस्कारों को मजबूत किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान पटेल नगर एवं अंबिकापुरी बस्ती की महिलाओं को सम्मानित किया गया। वहीं बच्चों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। बच्चों को चॉकलेट वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद एवं शिक्षा विभाग की विभाग संयोजिका श्रीमती किरण को, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, विभाग सहसंयोजिका एवं मातृशक्ति की ओर से सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में सुनीता मिश्रा, सुमन लता गुप्ता, सीतेश गुप्ता, पूर्णिमा सक्सेना, इति सक्सेना, वैष्णवी गुप्ता, लीला पाण्डेय, गायत्री सक्सेना सहित पटेल नगर एवं अंबिकापुरी बस्ती की अनेक महिलाएं मौजूद रहीं। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी डीएन शर्मा, राजेश बाबू, अंश गुप्ता, अरविंद, मंत्री विनय प्रताप सिंह तथा परशुराम विद्यालय के संचालक राम बहादुर पाण्डेय की भी उपस्थिति रही। अंत में कार्यक्रम की आयोजिका विभाग सहसंयोजिका श्रीमती महेशा सिंह ने सभी अतिथियों, मातृशक्ति एवं उपस्थित बहनों का आभार व्यक्त किया। राधाष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भक्ति, सेवा, संस्कार और सामाजिक सम्मान का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
















































































