उसावां में सत्संग कार्यक्रम में पहुंचे भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक,समिति ने किया भव्य स्वागत
उसावां। नगर में आयोजित धन निरंकार सत्संग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और गुरुजनों के आध्यात्मिक संदेशों को श्रद्धापूर्वक सुना। कार्यक्रम में गुरुजी रामकिशोर मुखी ने श्रद्धालुओं को मानवता, प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश देते हुए कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल अपने लिए जीना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के सुख-दुख में सहभागी बनना है। उन्होंने कहा कि भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और दुखी व्यक्ति को सहारा देना मानव जीवन की सबसे बड़ी सेवा है।कार्यक्रम में भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक के पहुंचने पर सत्संग समिति की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राजेश बाघरे द्वारा किया गया। डॉ. पाठक ने सत्संग में मौजूद श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर समिति एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।सत्संग को संबोधित करते हुए गुरुजी रामकिशोर मुखी ने कहा कि जब व्यक्ति दूसरे के सुख-दुख में खड़ा होता है, तभी समाज में सच्चा भाईचारा मजबूत होता है। समाज में प्रेम, सहयोग और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना ही सकारात्मक वातावरण तैयार करती है। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की तभी संभव है, जब समाज के लोग आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें।उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि युवाओं को जातिवाद की संकीर्ण सोच से बाहर निकलकर राष्ट्रवाद की भावना को अपनाना चाहिए। युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और यदि युवा समाज को जोड़ने तथा राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करेंगे तो देश निश्चित रूप से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा।रामकिशोर मुखी ने कहा कि मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर प्रेमपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए। अहंकार व्यक्ति को दूसरों से दूर करता है, जबकि प्रेम और विनम्रता लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है। उन्होंने कहा कि छोटे-बड़े की भावना को भी मन से त्यागना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के अंदर सर्वशक्तिमान का वास है। जब हम हर व्यक्ति में ईश्वर का स्वरूप देखने लगते हैं, तभी समाज में वास्तविक समानता और भाईचारा स्थापित होता है।
सत्संग कार्यक्रम में भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक ने कहा कि इस तरह के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से गुरुजन और संत हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही जब एक स्थान पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं तो आपसी मेलजोल, तालमेल और सौहार्द भी मजबूत होता है।डॉ. पाठक ने कहा कि संतों, गुरुओं और ज्ञानियों का सानिध्य व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। उनके विचारों और अनुभवों से व्यक्ति को अच्छे-बुरे का अंतर समझने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध होता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक कार्यक्रम केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से समाज में सेवा, सहयोग, प्रेम और सद्भाव का संदेश भी पहुंचता है।उन्होंने आयोजन समिति एवं आयोजक राजेश बाघरे को सफल कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज में ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने से ही मजबूत समाज का निर्माण किया जा सकता है।
सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरुजी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और मानव सेवा तथा सद्भाव के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और युवा श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजन के दौरान वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक बना रहा।इस अवसर पर अरविंद अग्निहोत्री, प्रदीप तिवारी, पंकज मिश्रा, शिवम पांडेय, कालीचरण कश्यप, कुलदीप मौर्य, मनोज शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजकों ने कार्यक्रम में पहुंचने वाले सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
















































































