एपीएस इंटरनेशनल स्कूल में गूंजा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का डंका,11 स्कूलों ने सहभागिता की
उझानी। ए.पी.एस. इंटरनेशनल स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशा-निर्देशों के तहत कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर जिला स्तरीय विचार-विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बदायूं जनपद के 11 विद्यालयों के शिक्षकों ने प्रतिभाग कर कक्षा-कक्ष में एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग के प्रयोगों एवं उनके परिणामों को साझा किया।
कार्यशाला में निर्णायक मंडल में एसआरएमएस सीईटी, बरेली के आईटी विभागाध्यक्ष ई. आशीष अग्रवाल, ब्लूमिंग डेल स्कूल, बदायूं के प्रधानाचार्य संजीव सिंह राठौर तथा बीआरबी मॉडल स्कूल, बदायूं के प्रधानाचार्य ब्रजेश भट्ट शामिल रहे। एपीएस इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य रविन्द्र भट्ट ने सभी निर्णायकों का पौधे भेंट कर स्वागत किया। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रधानाचार्य रविन्द्र भट्ट ने की।
कार्यशाला में बीआरबी मॉडल स्कूल, ब्लूमिंग फ्लावर्स, एपीएस इंटरनेशनल स्कूल उझानी, एफएनपीएस बदायूं, वीआर पब्लिक स्कूल, आरएसएमएस, मदर्स पब्लिक स्कूल, थिथोनस इंटरनेशनल स्कूल, जीपीएस स्कूल, एचजी इंटरनेशनल तथा अल हफीज एजुकेशन की ओर से केस पेपर प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागी विद्यालयों ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई को कक्षा-कक्ष से जोड़ने के लिए किए जा रहे नए प्रयोगों, गतिविधियों और उनके परिणामों की जानकारी साझा की।
विशेषज्ञों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इनके प्रभावी प्रयोग से विद्यार्थियों में समस्या समाधान क्षमता, तार्किक चिंतन और तकनीकी कौशल विकसित किए जा सकते हैं। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न विद्यालयों में अपनाई जा रही नई शिक्षण पद्धतियों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।
ई. आशीष अग्रवाल ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल आकर्षक प्रस्तुतियां देना नहीं, बल्कि कक्षा-कक्ष में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और एआई से जुड़ी वास्तविक गतिविधियों तथा उनके प्रभाव को साझा करना है। संजीव सिंह राठौर ने शिक्षकों से कार्यशाला में मिली सीख को अपने विद्यालयों की कक्षाओं में लागू करने और अन्य शिक्षकों के साथ साझा करने का आह्वान किया।
प्रधानाचार्य ब्रजेश भट्ट ने कहा कि किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पहला कदम उठाना जरूरी है। शिक्षकों को एक-दूसरे से सीखते हुए नए नवाचारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदायूं के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को साथ आकर सकारात्मक शैक्षिक बदलाव के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
कार्यशाला का समापन ज्ञान, अनुभव और नवाचारों के आदान-प्रदान के साथ हुआ। प्रतिभागी शिक्षकों ने नई शिक्षण विधियों और एआई आधारित नवाचारों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण सीख हासिल की।
















































































