बदायूं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारियों की आवश्यक बैठक हुई। बैठक में रामा हॉस्पिटल एवं सर्जन डॉ. अनमोल राज गुप्ता को लेकर सोशल मीडिया और कुछ प्रिंट मीडिया में प्रसारित की जा रही कथित भ्रामक एवं अशोभनीय बातों पर चिंता जताई गई। आईएमए पदाधिकारियों ने तीन मामलों के संबंध में अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तथ्यों को जाने बिना चिकित्सकों पर आरोप लगाना उचित नहीं है।आईएमए के अनुसार पहला मामला देव पाठक से संबंधित है। पदाधिकारियों ने बताया कि यह मामला सर्जन डॉ. अनमोल राज गुप्ता को कथित रूप से डराने-धमकाने और पैसे कम कराने के दबाव से जुड़ा है। इसका किसी ऑपरेशन से कोई संबंध नहीं है।दूसरे मामले में राजवीर को सिर में चोट लगी थी। आईएमए पदाधिकारियों के अनुसार यह न्यूरोसर्जरी से संबंधित मामला था और इसका भी डॉ. अनमोल राज गुप्ता से कोई लेना-देना नहीं था। चिकित्सकों ने कहा कि हेड इंजरी अत्यंत जटिल स्थिति होती है और मरीज के परिजनों को संभावित जोखिमों की जानकारी दी गई थी। मरीज को वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस से हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन परिजन उसे बिना वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस से ले गए और रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। तीसरे मामले में जगदीश गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। आईएमए के अनुसार 22 जुलाई को उसका ऑपरेशन हुआ और 26 जुलाई को छुट्टी दी गई। मरीज डायबिटीज से भी पीड़ित था और उपचार में लापरवाही के कारण जटिलताएं बढ़ीं। उसे 1 और 6 अगस्त को भी देखा गया तथा कुछ टांके निकाले गए। 11 अगस्त को अस्पताल लाए जाने पर मरीज मृत अवस्था में था। आईएमए ने कहा कि चिकित्सकों के खिलाफ लगातार आरोप और अस्पतालों में अनावश्यक हंगामे से डॉक्टरों का मनोबल प्रभावित होगा। इससे गंभीर मरीजों का उपचार और जटिल ऑपरेशन करना मुश्किल हो सकता है। बैठक में आईएमए के अन्य पदाधिकारी एवं चिकित्सक मौजूद रहे।