बरेली। महानगर कॉलोनी निवासी सुधीर उपाध्याय ने अपने सगे चाचा एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम कुमार का नाम अमरोहा जिले के गजरौला ब्लॉक में लगे स्वतंत्रता सेनानी शिलापट्ट पर दोबारा दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों से शासन-प्रशासन से पत्राचार के बावजूद अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, उनके प्रस्तावित आमरण अनशन की अनुमति भी नहीं दी गई है।सुधीर उपाध्याय के अनुसार उनके चाचा राम कुमार पुत्र भीमसेन निवासी ग्राम कांकाठेर, ब्लॉक गजरौला, जिला अमरोहा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट मुरादाबाद के आदेश पर उन्हें 8 मई 1941 को डीआईआर की धारा 34/38 के तहत छह माह के लिए 25 रुपये जुर्माने के साथ मुरादाबाद कारागार में निरुद्ध किया गया था। 25 नवंबर 1941 को उन्हें जेल से रिहा किया गया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी के रूप में राम कुमार का नाम पहले गजरौला ब्लॉक में लगे शिलापट्ट पर दर्ज था, लेकिन बाद में बदले गए शिलापट्ट पर उनका नाम दोबारा दर्ज नहीं किया गया। उनका कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सम्मान स्वरूप सरकार की ओर से ग्राम शहबाजपुर डोर, तहसील हसनपुर, जिला अमरोहा में करीब पौने दो बीघा भूमि भी दी गई थी। सुधीर उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने करीब दो माह पूर्व मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्त मुरादाबाद और जिलाधिकारी अमरोहा समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर 15 अगस्त से गजरौला ब्लॉक स्थित शिलापट्ट के सामने आमरण अनशन की अनुमति मांगी थी। इसके बावजूद न तो नाम दर्ज कराने के संबंध में सूचना मिली और न ही अनशन की अनुमति दी गई। उन्होंने 9 अगस्त को जिला विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), जिलाधिकारी अमरोहा और खंड विकास अधिकारी गजरौला को ई-मेल एवं स्पीड पोस्ट से पुनः पत्र भेजकर नाम शिलापट्ट पर दर्ज कराने अथवा आमरण अनशन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।