एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में लगा तीन दिवसीय कैंसर स्क्रीनिंग कैंप
बरेली। एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज की ओर से आजादी के पर्व पर ‘देश की आजादी से, कैंसर से आजादी तक’ नाम से तीन दिवसीय कैंसर स्क्रीनिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन बुधवार को कैंप में 100 से ज्यादा लोग पहुंचे और स्तन कैंसर, मुंह का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, पेट व आंत का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़े का कैंसर की स्क्रीनिंग कराई। मैमोग्राफी, एक्स रे चेस्ट, अल्ट्रासाउंड ब्रेस्ट, फाइब्रोस्कैन, लैरिंगोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड टीवीएस, एस पीएसए, एचपीवी डीएनए, सीबीसी, एलबीसी और ऑकल्ट ब्लड स्टूल की निशुल्क जांच के बाद रिपोर्ट में 50 मरीज संदिग्ध मिले। ऑन्कोलॉजिस्ट डा.अरविंद चौहान ने ओरल कैंसर के प्रति लोगों को जागरुक किया और परिचर्चा में इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय बताए।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के आरआर कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर की ओर से 12 से 14 अगस्त तक संचालित तीन दिवसीय कैंसर स्क्रीनिंग कैंप ‘कैंसर से आजादी’ आयोजित किया जा रहा है। कैंसर विभाग में सुबह 9 बजे स्क्रीनिंग कैंप आरंभ हुआ। मरीजों की संख्या को देखते हुए दोपहर 2 के स्थान पर तीन बजे तक कैंसर विशेषज्ञ डा.पियूष कुमार, डा.मनोज कुमार टांगड़ी, डा.शुभांशु गुप्ता, डा.अदादि श्रीनिवास नायडू, डा.हिमांशी खट्टर और डा.दिशा सत्या मरीजों के परामर्श के लिए मौजूद रहे। सभी ने स्तन कैंसर, मुंह का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, पेट व आंत का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़े के कैंसर की स्क्रीनिंग के बाद निशुल्क परामर्श दिया।
मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में डा.अरविंद चौहान ने ओरल कैंसर के लक्षण, कारण और बचाव के उपाय बता कर लोगों को जागरुक किया। डा.चौहान ने कहा कि ओरल कैंसर बेहद गंभीर समस्या है। इसकी मुख्य वजह धूम्रपान और तंबाकू का उपयोग, अत्यधिक शराब का सेवन है। तम्बाकू, बीड़ी और सिगरेट की डिब्बी या पुड़िया पर मुंह के कैंसर की जानकारी दी जाती है। इसकी भयावहता को दिखाता हुआ फोटो भी बना होता है, लेकिन फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही मुंह के कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। नतीजा जीभ, होठ, मसूड़े, गाल, तालू के कैंसर के रूप में सामने आता है। ऐसा होने के बाद भी लोग नीम हकीम से इलाज कराते रहते हैं। ज्यादा परेशानी बढ़ने पर कैंसर विशेषज्ञ के पास पहुंचते हैं और तब तक कैंसर आरंभिक चरणों से होता हुआ तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है। मुंह के कैंसर से पूरी तरह निजात पाना संभव है अगर प्रारंभिक अवस्था में इसका इलाज हो जाए। ऐसे में अगर किसी को भी अगर मुंह, होंठ या गले में दर्द, जलन, गांठ या मोटा धब्बा हो, लगातार गले में खराश, स्वर बैठना या आवाज का खो रही हो, चबाने, निगलने या बोलने में दिक्कत हो, गर्दन में गांठ, जबड़े में सूजन की शिकायत हो, मुँह में दर्द या खून आता हो, जबड़े या जीभ को हिलाने में कठिनाई हो, जीभ या मुंह सुन्न हो जाता हो, तीन सप्ताह से अधिक समय तक मुंह में छाले रहें या मुंह में गांठ हो तो तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से मिल कर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। समय से इलाज होने पर कैंसर से छुटकारा पाना संभव है।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज स्थित आरआर कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डा.पियूष कुमार अग्रवाल ने पहले दिन के कैंप के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले दिन कैंप में पहुंचे 100 से ज्यादा मरीजों की स्तन कैंसर, मुंह का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, पेट व आंत का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़े का कैंसर की स्क्रीनिंग हुई। स्क्रीनिंग में 00 मरीजों में कैंसर के आरंभिक लक्षणों के साथ 50 मरीज संदिग्ध मिले। 20 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से ग्रस्त मिलीं जबकि 15 मरीजों में ओरल कैंसर की जानकारी मिली। डा.पियूष ने कहा कि ‘कैंसर से आजादी’ कैंप के दूसरे दिन गुरुवार (13 अगस्त) को डा.पवन मेहरोत्रा गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, पेट एवं आंत के कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और फेफड़ों के कैंसर के बारे में जानकारी देकर लोगों को जागरुक करेंगे। जबकि कैंप के अंतिम दिन शुक्रवार (14 अगस्त) को डा.हिमांशी खट्टर ब्रेस्ट कैंसर के प्रति महिलाओं को जागरुक करेंगी। 14 अगस्त (शुक्रवार) से ही एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में ब्रेस्ट क्लीनिक भी आरंभ किया जाएगा। प्रति सप्ताह शुक्रवार को संचालित होने वाले इस ब्रेस्ट क्लीनिक में ऑंकोलॉजिस्ट डा.हिमांशी खट्टर महिलाओं की स्क्रीनिंग के साथ परामर्श देंगी।















































































