बदायूँ में रातभर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुलिस की मुस्तैदी से टली संभावित वारदात; मां-बेटों समेत परिवार सुरक्षित
बदायूं। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में एक परिवार के साथ कथित रूप से बड़ी वारदात की आशंका के बीच पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने संभावित अनहोनी को टाल दिया। पीड़िता के आरोपों के अनुसार, घर के भीतर कई लोगों को छिपाकर परिवार को बंधक बनाने तथा लूटपाट व जान से मारने की साजिश रची गई थी। सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना पुलिस, मैकूलाल चौकी, डायल-112 और कोबरा टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद मां, दो मासूम बेटों और बुजुर्ग महिला को सुरक्षित किया। मामले में पुलिस ने तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी है।पीड़िता के मुताबिक, घटना 1 अगस्त 2026 की रात करीब 10:30 बजे की है। उस समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जबकि घर का गार्ड महेंद्र अपनी पत्नी के साथ भोजन लेने बाहर गया हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान रितिका वेलिंगटन ने 10 से 15 लोगों को घर के अंदर बुलाकर छिपा लिया और मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। जब गार्ड ने गेट खुलवाने के लिए श्रीमती मोहिनी वेलिंगटन और रितिका वेलिंगटन को कई बार फोन किया तो दोनों ने कथित रूप से फोन बंद कर दिए। पीड़िता का आरोप है कि गेट बंद करने के पीछे परिवार को नुकसान पहुंचाने और लूटपाट की साजिश थी।

हालात बिगड़ने पर पीड़िता ने डायल-112 पर सूचना दी। पुलिस के पहली बार पहुंचने पर भी गेट नहीं खोला गया। इसके बाद पुलिस ने ताला खुलवाकर पीड़िता को बाहर निकाला, लेकिन आरोप है कि उसी दौरान घर के भीतर मौजूद उनकी बुजुर्ग मां और आठ व दस वर्ष के दो बेटों को फिर से अंदर बंद कर दिया गया।सूचना मिलते ही मैकूलाल चौकी प्रभारी डॉ. दिनेश शर्मा पुलिस टीम के साथ पहुंचे और काफी देर तक समझाने का प्रयास किया। उन्होंने बच्चों और बुजुर्ग महिला की सुरक्षा का हवाला देकर विवाद शांत कराने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस थाना प्रभारी हरिंदर सिंह महिला पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने गेट खुलवाकर पीड़िता और उनके बच्चों को सुरक्षित किया। पुलिस के अनुसार, इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध और हाथापाई का प्रयास किया, जिस पर महिला पुलिस और अन्य पुलिसकर्मियों ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई।रात करीब तीन बजे फिर से परिसर में 10 से 15 लोगों के एकत्र होने की सूचना मिलने पर पीड़िता ने दोबारा डायल-112 पर कॉल किया। सूचना मिलते ही 112 टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची तथा मौजूद लोगों को चेतावनी देकर वहां से हटाया। इसके बाद पूरी रात क्षेत्र में पुलिस की निगरानी जारी रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
पीड़िता ने थाना प्रभारी हरिंदर सिंह, चौकी प्रभारी डॉ. दिनेश शर्मा, डायल-112 और कोबरा टीम की सराहना करते हुए कहा कि यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो उनके परिवार के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती थी। उन्होंने पुलिस टीम को उनके साहस, सतर्कता और संवेदनशीलता के लिए सम्मानित किए जाने की मांग भी की है।पुलिस का कहना है कि मामले में प्राप्त तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। शिकायत में कुंवर प्रताप यादव, रोशन लाल, शैलेंद्र सिंह, सेलिना शोइन, संजू, माया मेसी, शीतल मेसी, एक इलेक्ट्रीशियन, एक प्लंबर तथा गेट पर तैनात गार्ड विनोद सहित कई लोगों के नाम बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल मामला जांच के दायरे में है। पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जा रही है।















































































