बरेली। ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) ने हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी उर्स-ए-अमीने शरीअत के मुबारक दिन उर्स-ए-रज़वी की तैयारियों को लेकर पहली बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता नबीरा-ए-आला हज़रत एवं आरएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने की, जिसमें उर्स-ए-रज़वी के आयोजन का प्रारंभिक खाका तैयार किया गया। मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने बताया कि वह हुज़ूर अमीने शरीअत के नवासे हैं और उनसे ख़िलाफ़त का शर्फ़ भी प्राप्त है। इसी परंपरा को निभाते हुए हर साल उर्स-ए-अमीने शरीअत के दिन ही उर्स-ए-रज़वी की पहली बैठक आयोजित की जाती है। बैठक में मरकज़ी मस्जिद बीबी जी में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। पहले दिन होने वाले नातिया मुशायरे, दूसरे दिन के जलसे में शामिल होने वाले नातख़्वानों और उलमा के नामों पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि तीसरे एवं अंतिम दिन आयोजित होने वाले कुल शरीफ़ की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कहा कि जल्द ही एक बड़ी बैठक बुलाकर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसमें विभिन्न जिलों से उलमा, आरएसी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। बैठक का समापन दुआ के साथ हुआ। बैठक के बाद मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी के नेतृत्व में काफिला कांकर टोला स्थित दरगाह-ए-अमीने शरीअत पहुँचा, जहाँ जलसे में शिरकत कर ख़ानदान-ए-रज़विया के बुज़ुर्ग को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया गया। इस अवसर पर मुफ्ती उमर रज़ा, हाफिज इमरान रज़ा, मौलाना कमरुज्जमा, सय्यद तौकीर रज़ा सहित आरएसी के अनेक पदाधिकारी, उलमा और बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।