उर्स-ए-नूरी की महक से दरगाह की गली महकी। देश विदेश से पहुंचे हजारों जायरीन

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बरेली। आला हजरत के छोटे साहबजादे सरकार मुफ्ती-ए-आज़म हिंद मुस्तफा रज़ा खां का 46वा एक दिवसीय उर्स-ए-नूरी दरगाह ताजुशारिया पर काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा कादरी (असजद मियां) की सरपरस्ती और जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां की सदारत व जमात रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मिया की निगरानी में बड़ी ही शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। जमात रजा के पूर्व प्रवक्ता समरान खान ने बताया बाद नमाज़-ए-फज्र दरगाह ताजुशारिया पर कुरानख्वानी से उर्स-ए-नूरी का आगाज़ हुआ। दिन भर देश-विदेश से आए जायरीनों ने दरगाह आला हजरत, दरगाह ताजुश्शरिया और तमाम बुजुर्गों की बारगाह में हाज़िरी देने का सिलसिला चलता रहा। जायरीनों के लिए लंगर का इंतजाम भी किया गया। बाद नमाज़-ए-मगरिब मिलाद-ए-मुस्तफा की महफिल दरगाह ताजुश्शरिया पर सजाई गई। सैय्यद अब्दुल समद और सैयद हारिस ने मुफ्ती-ए-आज़म हिंद के लिखे हुए कलाम पेश किए। मुख्य कार्यक्रम बाद नमाज-ए-इशा इमाम मस्जिद बारादरी मौलाना अज़हर रज़ा खान ने कुरान शरीफ़ की तिलावत से शुरू किया। सैयद कैफ़ी अली और आज़म रज़ा तहसीनी ने नात-ओ-मनक़बत का नजराना पेश किया। देश विदेश से आए उलमा-ए-इकराम और सज्जादागान की तकरीर देर रात तक चलती रही। सैयद फुरकान रज़ा रामपुरी ने सरकार मुफ्ती-ए-आजम हिंद की जिंदगी पर रौशनी डालते हुए कहा आप नमाज़ रोज़े के पाबंद और एक सच्चे आशिक-ए-रसूल थे, आपने अपनी जिंदगी में एक भी नमाज़ कज़ा नहीं की। आप लोग भी मुफ्ती-ए-आजम हिंद के रास्ते पर चले और नमाज़ पढ़ने की पाबंदी करें। मुफ्ती शहज़ाद आलम ने कहां मुफ्ती-ए-आजम हिंद की पैदाइश 18 जुलाई 1892 को मोहल्ला सौदागरान हुई थी। 12 नवंबर 1981 को विसाल हुआ। 92 साल की जिंदगी में कई चर्चित फतवे दिए। इनमें नसबंदी, लाउडस्पीकर पर नमाज़ और फ़ोटो खिंचाने के खिलाफ दिए गए फतवे ने समाज में हलचल पैदा कर दी थी। पूरी जिंदगी में अपने 100 से ज्यादा फतवे लिखें। फतवो के अलावा मुफ्ती-ए-आज़म हिंद ने इल्म पर काफी काम किया। इसके अलावा मुफ्ती-ए-आजम हिंद ने लाउडस्पीकर पर नमाज़ के खिलाफ भी फतवा दिया था। नमाज़ लाउडस्पीकर पर नहीं हो सकती। इस के अलावा काल्पी के सज्जादानशीन सैयद गियास मियां, मुफ्ती आशिक हुसैन, मुफ्ती शकील रामपुरी, मौलाना जाहिद अली, मुफ्ती नश्तर फारूकी, कारी काज़िम रज़ा आदि ने मुफ्ती-ए-आज़म हिंद की जिंदगी पर रौशनी डाली। रात को 01 बजकर 40 मिनट पर सरकार मुफ्ती-ए-आज़म हिंद के 46वा कुल की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी रिजवान और अब्दुल सत्तार रज़ा ने शिज़रा शरीफ़ गियाज़ मियां ने पढ़ा और काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मियां ने देश में अमन-ओ-चैन, प्यार मोहब्बत और देश की तरक्की के लिए खुसूसी दुआ की। इसी के साथ एक दिवसीय उर्स-ए-नूरी का समापन हो गया। कार्यक्रम की निजामत मौलाना गुलज़ार ने की।

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उर्स-ए-नूरी में ऑनलाइन के माध्यम से जुड़े लाखों जायरीन।जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के आईटी सेल प्रभारी अतीक अहमद ने बताया एक दिवसीय उर्स-ए-नूरी का लाइव प्रसारण मिक्सर और यूट्यूब के जरिए दुनिया भर में सुना गया। जो जायरीन किसी कारण उर्स-ए-नूरी में बरेली शरीफ नहीं पहुंच सके उन्होंने ऑनलाइन के माध्यम से उर्स-ए-नूरी में शिरकत की और अपने घरों में नियाज और नजर का एहतेमाम किया। उर्स-ए-नूरी की मुबारक बाद दी और उर्स-ए-रजवी में आने की इच्छा जताई।उर्स की व्यवस्थाओं में मौलाना आबिद नूरी, मौलाना सैय्यद अजीमुद्दीन अज़हरी, मोईन खान, हाफ़िज़ इकराम रज़ा खां, डॉक्टर मेंहदी हसन, यासीन खान, समरान खान, अब्दुल्लाह रज़ा खां, मोईन अख़्तर, सैय्यद सैफ़ रज़ा क़ादरी, बख्तियार खां, दानिश रज़ा, शमीम अहमद, कौसर अली, शाहिबुद्दीन रज़वी, गुलाम हुसैन, रेहान रज़ा, आदि लोग उपस्थित रहें।

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