उझान-कोतवाली उझानी क्षेत्र के ग्राम मानकपुर में शुक्रवार की शाम यौम-ए-आशूरा का मंज़र बेहद पुरसोज़ और ग़मगीन रहा। माह-ए-मोहर्रम की 10 तारीख़ पर हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शोहदा-ए-करबला की अज़ीम शहादत की याद में अज़ादारों ने नम आंखों से ताज़ियों का जुलूस निकाला।पूरे गांव में या हुसैन, या हुसैन की पुरदर्द सदाएं गूंजती रहीं। अज़ादारों ने सीना-ज़नी और नौहा-ख़्वानी कर इमाम हुसैन की मज़लूमियत और उनके जांनिसारों की क़ुर्बानी को याद किया। सोगवार माहौल में अकीदतमंदों ने इमाम-ए-आली मक़ाम की बारगाह में ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।मुक़र्रर रास्तों से होता हुआ ताज़ियों का जुलूस पूरे अदब-ओ-एहतराम के साथ करबला पहुंचा। वहां उलमा-ए-किराम की सरपरस्ती में मजलिस हुई और फातिहा-ख़्वानी के बाद तमाम मज़हबी रुसूमात अदा कर ताज़ियों को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।जुलूस में बड़ी तादाद में अज़ादारों के साथ-साथ दूसरे मज़ाहिब के लोगों ने भी शिरकत कर हुसैनियत के पैग़ाम-ए-अमन और इंसानियत का इज़हार किया। नौजवानों और बुज़ुर्गों ने मिलकर जुलूस के इंतज़ामात को बखूबी संभाला।अमन-ओ-अमान के मद्देनज़र स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकस रहा। कोतवाली पुलिस जुलूस के पूरे रास्ते पर मुस्तैदी से निगरानी करती रही। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।इस मौक़े पर उलमा ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत ज़ुल्म के ख़िलाफ डट जाने, हक़, इंसाफ़ और दीन की हिफ़ाज़त का लाज़वाल पैग़ाम है। अज़ादारों ने इमाम के बताए रास्ते पर चलने का अहद किया। ग़म और अकीदत से लबरेज़ इस आयोजन का इख़्तिताम शाम करीब साढ़े पांच बजे करबला में ताज़ियों की तदफ़ीन के साथ हुआ।