वेद मंत्रोच्चारण के साथ हुआ पूजन, युगऋषि के राष्ट्र निर्माण एवं विचार क्रांति के संदेश को किया याद

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बदायूं। भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की पुण्यतिथि पर शनिवार को प्रखर बाल संस्कारशाला के कैंप कार्यालय में वेद मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धापूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर युगऋषि के जीवन, व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विचार गोष्ठी भी आयोजित की गई।गायत्री शक्तिपीठ के वरिष्ठ ट्रस्टी सुखपाल शर्मा ने बताया कि युगऋषि की प्रथम पुण्यतिथि पर 27 जून 1991 को भारत सरकार ने उनके अद्वितीय राष्ट्र एवं समाजसेवी योगदान के सम्मान में एक रुपये मूल्य के स्मारक डाक टिकट जारी किए थे। इनका विमोचन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने किया था। उन्होंने बताया कि शांतिकुंज हरिद्वार के स्वर्ण जयंती वर्ष (1971-2021) के अवसर पर भारत सरकार ने दूसरी बार भी पांच रुपये मूल्य का स्मारक डाक टिकट जारी कर युगऋषि के योगदान को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, तप, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक क्रांति का अनुपम उदाहरण रहा। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ आजादी के बाद समाज में नैतिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण का व्यापक अभियान चलाया। उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान, गायत्री तपोभूमि एवं अखण्ड ज्योति संस्थान जैसे संस्थानों की स्थापना कर अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय की नई दिशा दी। उनके द्वारा रचित हजारों ग्रंथ आज भी व्यक्तित्व निर्माण और जीवन प्रबंधन के प्रेरणास्रोत हैं।
वरिष्ठ परिजन रघुनाथ सिंह ने कहा कि युगऋषि ने गायत्री साधना, यज्ञ संस्कृति, संस्कार परंपरा, नारी जागरण, युवा चेतना, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और सामाजिक समरसता जैसे अभियानों को जन-जन तक पहुंचाया।
इंजीनियर नत्थूलाल शर्मा ने कहा कि युगऋषि का संदेश “हम बदलेंगे—युग बदलेगा, हम सुधरेंगे—युग सुधरेगा” आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने व्यक्ति निर्माण को ही समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उनके मार्गदर्शन में देश-विदेश में हजारों शक्तिपीठ, प्रज्ञा संस्थान एवं प्रज्ञा मंडल आज भी सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में मृत्युंजय शर्मा, देवेंद्र पाल, मान्या शर्मा, भूमि शर्मा, दीप्ति शर्मा, सौरभ सहित अनेक गायत्री परिजन उपस्थित रहे।

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