बरेली। सुभाषनगर स्थित पुरवा बब्बन खाँ में मोहर्रम के मुकद्दस महीने के मद्देनजर नवी मोहर्रम को इमामबाड़े में हाज़री देकर मन्नतों के सेहरे पेश किये, नियाज़ नज़र का तबर्रुक अकीदतमंदों को बाँटा गया। शहीदे कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके जानसारों की शहादत को याद कर नम आंखों से खिराजे अकीदत पेश की। मन्नतें पूरी होने पर चढ़ाए अलम, बंटा शर्बत का लंगर इमामबाड़े के मुतावल्ली आसिफ खान ने बताया कि इमामबाड़े ज़िक्रे हुसैन कि महफ़िल में बड़ी तादाद में अकीदतमंदों शामिल हुए। सलमा खान ने बताया कि इस ऐतिहासिक इमामबाड़े से लोगों की गहरी अकीदतमंदी जुड़ी है। यहाँ बड़ी संख्या में अकीदतमंद मन्नतें और मुरादें मांगने आते हैं। मोहर्रम के दौरान यहाँ हर रोज शर्बत व अन्य तबर्रुक का लंगर तकसीम (वितरित) किया किये गये। बाद नमाजे इशा अकीदतमंदो इमामबाड़े में इमाम हुसैन की याद में ज़िक्रे हुसैन की महफिल सजाई। इस दौरान बारगाहे इलाही में विशेष दुआएं मांगी गईं। अकीदतमंदों ने खासतौर पर मुल्क व आवाम की सलामती, देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए दुआ की। इसके साथ ही बीमारों को शिफा मिलने और बेरोजगारों को रोजगार की बंदोबस्त के लिए भी खुसूसी तौर पर हाथ उठाए गए।।इस अकीदत के मौके पर मुख्य रूप से शोएब उद्दीन सिद्दीकी एडवोकेट,फरजाना रहुफ, मेहनाज, वामिक खान, कामिल खान, शाजिया,आमिर खान, साहिर खान, गजल, सैफ उल्लाह खां, आतिफ, महेकशा, समरीन, हिना, निशी, आशु, अरसालान, फेजरिन, नसीन उल्लाह खां (एडवोकेट), नौशाद अली, रुबीना, नसीम अहमद, सलीम अहमद और साहिल खान सहित भारी संख्या में स्थानीय और दूर-दराज से आए अकीदतमंद शामिल रहे।