सामाजिक चेतना के केंद्र बिंदु हैं विद्या भारती के विद्यालय, हरिशंकर

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विद्या भारती ब्रज प्रांत द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षक, प्रशिक्षक कार्यशाला का समापन

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बदायूं ।बदायूं, मीरा चौकी स्थित श्री राम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आज विद्या भारती ब्रज प्रांत द्वारा आयोजित न ई राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षक, प्रशिक्षक कार्यशाला का समापन हुआ. कार्यशाला में वक्ताओं ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित विषयों को विस्तार से रखा.
कार्यशाला का शुभारंभ विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष हरिशंकरशर्मा, (प्रांत संगठन मंत्री, विद्या भारती , ब्रज प्रांत ), राम किशोर श्रीवास्तव,( प्रदेश निरीक्षक शिशु शिक्षा समिति ब्रज प्रांत), हरीश गंगवार, (संभाग निरीक्षक जन शिक्षा समिति बरेली )ने दीप प्रज्वलन कर तथा सुरेंद्र कुमार गोला (प्रधानाचार्य अवागढ़),एवं संकुल प्रमुख कालिका प्रसाद गंगवार ने पुष्प अर्पित कर किया.

विद्या भारती ब्रज प्रांत के संगठन मंत्री हरि शंकर शर्मा ने कहा, नई शिक्षा नीति कैसे लागू हो? यह चुनौतीपूर्ण विषय है. नई दिल्ली में विद्या भारती की राष्ट्रीय बैठक हुई जिसमें योजना अनुसार क्षेत्र. प्रांत के लोगों की योजना बनी. गुजरात में प्रचारक वर्ग विद्या भारती में ईसीसी ई की जानकारी 5 दिन दी गई. श्री शंकर ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए. हम जागरूक होंगे तभी हम अन्य लोगों को जागरूक कर सकते है. विद्या भारती के विद्यालय सामाजिक चेतना के केंद्र हैं.
द्वितीय सत्र में प्रदेश निरीक्षक राम किशोर श्रीवास्तव ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य बताते हुए कहा, भारतीय जीवन मूल्यों का स्थापन अपने आचरण के द्वारा प्रमुख केंद्र अध्यापक जिसे देखकर शिशु सीखता है सभी जीवन मूल्य शिक्षक के अंदर हो. उससे वह शिशु तक प्रवाहित हो. ज्ञान का हस्तांतरण एक दूसरे को हो. उच्चतर गुणवत्ता युक्त शिक्षा, भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाना, छात्रों में मौलिक दायित्व और संवैधानिक मूल्यों का जागरण हो, संविधान का पालन, राष्ट्रगान, राष्ट्रीयता का जागरण का भाव जगाना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अवधारणा है. गतिविधि आधारित शिक्षा, संख्यात्मक अंक ज्ञान के सार्वजनिक तथ्य आधारभूत चरण की विशेषताएं पंच तत्वों की निकटता, शिक्षा खोज आधारित, आधारभूत चरण की शिक्षा व्यवस्था के बारे में बताया.


तृतीय सत्र में सुरेंद्र कुमार गोला ने मौलिक आधारभूत साक्षरता , संख्यात्मकता और आनंदमय शिक्षा विषय को रखते हुए कहा. चिंतन करने से रचना उत्पन्न होती है इसे सभी दृष्टि दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है. शिशुओं को व्यवहारिक ज्ञान के माध्यम से अंक ज्ञान कराना. गीत खेल पहेली कहानी तथा वार्तालाप के माध्यम से सिखाना.
आगंतुक अतिथियों का परिचय प्रधानाचार्य कालिका प्रसाद गंगवार ने कराया.
इस मौके पर राजकुमार सिंह सेंगर, राजेश कुमार शर्मा, शैलेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार, प्रेमपाल सिंह, रूपेंद्र सिंह, कुलदीप कुमार, तेजेंद्र राघव आदि उपस्थित रहे.

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