रोहिलखण्ड विश्वविद्यालय में सुशासन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
बरेली । भारत सरकार के सुशासन, सेवा, जनकल्याण एवं विकास के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में एक विशेष जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रातः 9:30 बजे किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2014 से 2026 के मध्य देश में जनकल्याण, आधारभूत संरचना विकास, डिजिटल क्रांति, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा तथा तकनीक आधारित सुशासन के क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों एवं उपलब्धियों से प्रतिभागियों को अवगत कराना था। वक्ताओं ने विभिन्न योजनाओं एवं पहलों के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के सरकार के प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सुमित श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग तथा डॉ. अमित कुमार वर्मा, सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण , एमजेपी रोहिलखण्ड विश्वविद्यालय ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डिजिटल इंडिया, जन धन योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों, स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभाव पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं, उनके क्रियान्वयन, प्रभाव एवं भविष्य की संभावनाओं से संबंधित जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे। वक्ताओं ने उनके प्रश्नों के उत्तर दिए, जिससे कार्यक्रम एक स्वस्थ एवं ज्ञानवर्धक संवाद का रूप ले सका। विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए तथा शासन व्यवस्था में तकनीक और पारदर्शिता की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, प्रो. विनय ऋषिवाल ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने डिजिटल सशक्तिकरण, सेवा वितरण एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग देश की विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार है और उसे विभिन्न सरकारी योजनाओं, तकनीकी नवाचारों तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल योजनाओं के लाभार्थी ही न बनें, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने के वाहक भी बनें। प्रो. ऋषिवाल ने कहा कि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं।
कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने सहभागिता की, जिनमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। उपस्थित प्रमुख शिक्षकों में प्रो. विनय ऋषिवाल, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. आशुतोष, डॉ. शिवांगी, डॉ. प्रभात, डॉ. विनय मौर्य सहित विभिन्न विभागों के अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना की तथा कहा कि ऐसे संवादात्मक आयोजन विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों एवं राष्ट्रीय विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।















































































