बहेड़ी चीनी मिल की नीलामी रद्द , सपा नेता भगवत शरण गंगवार ने सरकार पर साधा निशाना
बरेली। बहेड़ी गन्ना चीनी मिल की जमीन की नीलामी रद्द होने के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री भगवत शरण गंगवार ने प्रेस वार्ता आयोजित कर इसे सामूहिक प्रयासों की जीत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते एक-एक कर क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों को बंद किया जा रहा है और अब बहेड़ी, नवाबगंज तथा बरखेड़ा (पीलीभीत) चीनी मिलों को बेचने की तैयारी की जा रही है।भगवत शरण गंगवार ने कहा कि बरखेड़ा चीनी मिल की स्थापना के लिए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मुलाकात की थी और आवश्यकता पड़ने पर विधायक पद से इस्तीफा देने तक की बात कही थी। तब जाकर यह चीनी मिल स्थापित हो सकी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में भी चीनी मिलों पर देनदारियां थीं, लेकिन सरकारों के दबाव में मिल मालिकों ने किसानों का बकाया भुगतान किया और मिलों का संचालन भी जारी रखा।पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में लाखों करोड़ रुपये के कर्ज बट्टे खाते में डाले गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी कंपनियों को राहत दी जा सकती है तो चीनी मिलों के किसानों का बकाया भुगतान सरकार स्वयं क्यों नहीं करती। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने बजट में बकाया भुगतान के लिए 475 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इसके बावजूद किसानों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि बहेड़ी, नवाबगंज और बरखेड़ा चीनी मिलों से क्षेत्र के चार हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलता है। यदि ये मिलें बंद हो गईं तो बेरोजगारी और बढ़ेगी। गंगवार ने आरोप लगाया कि सरकार और भू-माफियाओं की नजर इन मिलों की बेशकीमती जमीनों पर है। उन्होंने दावा किया कि बहेड़ी चीनी मिल को 28 करोड़ रुपये में बेचने की प्रक्रिया हुई, जबकि अब उससे अधिक कीमत देने वाले खरीदार सामने आ रहे हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सभी चीनी मिलों की नीलामी तत्काल प्रभाव से रोकी जाए, किसानों का बकाया भुगतान किया जाए तथा बंद पड़ी मिलों को पुनः संचालित करने की घोषणा की जाए।















































































