वीरेंद्र कुमार सक्सेना की जयंती पर हुई पंचम काव्यगोष्ठी. किया गया कलमकारों का सम्मान
बदायूँ। स्टेशन मार्ग पर स्थित देव कैफे के हाल में काव्यदीप हिंदी साहित्यिक संस्थान द्वारा संस्थान के प्रणेता स्व. वीरेंद्र कुमार सक्सेना की जयंती के अवसर पर पंचम काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर उस्ताद अहमद अमजदी एवं मंच संचालन राजवीर सिंह ‘तरंग’ ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप्ति सक्सेना दीप की सरस्वती वंदना से हुआ। शायर अहमद अमजदी ‘बदायूॅंनी’ ने फरमाया,‘
ज़माना तंग करेगा तुम्हें मुहब्बत में,
अगर है प्यार किसी से तो फिर नज़र से कहो।
सलामती से पहुंचना हो तुम को मंज़िल पर
तो अपनी बात कभी भी न हमसफ़र से कहो।।’
वरिष्ठ एवं सिद्धहस्त छंदकार कामेश पाठक ने एक बेटी की मार्मिक कहानी को छंदबद्ध कर प्रस्तुत किया,‘
ईश्वर का अनमोल खजाना दुनिया का उपहार है।
बेटी घर की तुलसी है, बेटी घर का श्रृंगार है।’
बिल्सी से तशरीफ़ लाए प्रसिद्ध कवि ओजस्वी जौहरी ने पढ़ा,‘
डर नहीं लगता है मुझ को तीर से तलवार से,
डर रहा हूँ आदमी के दोगले व्यवहार से।
बाँट कर खुशियाँ जगत को हक़ अदा करता रहा,
हो मुनाफ़ा या कि घाटा मुझ को मतलब प्यार से।।’
तत्पश्चात कवि अमन मयंक शर्मा ने कुछ मुक्तक दोहे सुनाकर कार्यक्रम को गति प्रदान की। उन्होंने हिंदी गजल सुनाते हुए सबको भावुक कर दिया, ‘
भूल सकता नहीं मांझी की कहानी पापा,
याद आती है हर इक बात पुरानी पापा।
जब भी होता है कभी दिल जो परिशां मेरा,
देख लेता हूं मैं तस्वीर तुम्हारी पापा।’
अगली कड़ी में मशहूर ग़ज़लकार शैलेन्द्र मिश्र ‘देव’ ने अपनी ग़ज़लों से समां बांध दिया। उन्होंने पढ़ा,‘
शख्स वो ही महान बनता है,सिर्फ़ अपना जो ध्यान रखता है।
धर्म सेवा मगर दिखावे को,काम करने का नाम करता है।’
सुप्रसिद्ध कवि–शायर राजवीर सिंह ‘तरंग’ ने बेहतरीन पंक्तियां पेश कीं,
‘पहले दिल से जरा मशवरा कीजिए,
फिर शुरू प्यार का सिलसिला कीजिए।
आपके मयकदे की पियेंगे शराब,
अपनी आंखों को तुम मयकदा कीजिए
गोष्ठी की संयोजिका कवयित्री दीप्ति सक्सेना दीप ने ईश्वर वंदना प्रस्तुत की जिसमें परमात्मा से मिलन की इच्छा व्यक्त की गई,
‘अँखियाँ हरि दर्शन अभिलाषी, दुनिया आकर्षण आभासी।
नीर–क्षीर से प्यास मिटे न, रसना चरणामृत की प्यासी।।’
नामचीन कवयित्री पल्लवी शर्मा ने वीरेंद्र कुमार सक्सेना जी के जीवन वृत्त को छूते हुए पढ़ा,‘
संघर्षों से पा कर के विजय, शक्ति अकूत बन गए।
वीरेंद्र कुमार सक्सेना जी, देवदूत बन गए।।’
इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में सुनील शर्मा ‘समर्थ’, अचिन मासूम, मंजू सक्सेना, गौरव सक्सेना, अनिका शाक्य,आलोक शाक्य आदि ने भी स्व. वीरेंद्र सक्सेना जी का भावपूर्ण स्मरण किया.















































































