बदायूँ में कीचड़ में डूब गई अंतिम यात्रा की गरिमा, अपनों को विदा करने के लिए दलदल से गुजरने को मजबूर हुए ग्रामीण

WhatsApp Image 2026-06-14 at 2.53.13 PM
WhatsAppImage2026-02-15at42216PM1
previous arrow
next arrow

बिल्सी (बदायूं)। एक ओर सरकारें गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाओं के दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बदायूं जनपद की ग्राम पंचायत बेहटा गुसाईं से सामने आई एक तस्वीर ने इन दावों की संवेदनशील हकीकत उजागर कर दी है। शुक्रवार को गांव निवासी इन्द्र पाल गुप्ता की धर्मपत्नी के निधन के बाद जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो शोकाकुल परिजनों और ग्रामीणों को शव को कंधों पर उठाकर कीचड़ और पानी से भरे दलदली रास्ते से श्मशान भूमि तक ले जाना पड़ा।
अंतिम यात्रा का यह दृश्य हर संवेदनशील व्यक्ति की आंखें नम कर देने वाला था। एक ओर परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने के दुःख में डूबा था, तो दूसरी ओर ग्रामीणों को कीचड़ में फिसलते और संघर्ष करते हुए शव को श्मशान तक पहुंचाने की मजबूरी झेलनी पड़ी। कई स्थानों पर रास्ता पूरी तरह जलमग्न था, जहां लोगों के पैर कीचड़ में धंस रहे थे, फिर भी वे अपने कंधों पर अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी निभाते रहे।ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान भूमि बेहटा गुसाईं से आलमपुर सम्पर्क मार्ग पर स्थित है। बीते वर्ष ग्रामीणों ने चंदा और सहयोग जुटाकर यहां कर्मशाला का निर्माण करा लिया था, लेकिन श्मशान तक पहुंचने वाला मार्ग आज भी बदहाली का शिकार है। बरसात होते ही यह रास्ता दलदल में बदल जाता है और अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी लोगों को अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगभग आठ हजार मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत में पांच वर्षों के दौरान विकास कार्यों का लाभ सभी क्षेत्रों तक समान रूप से नहीं पहुंच सका। उनका कहना है कि श्मशान भूमि तक जाने वाले मार्ग की समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन इसके समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जीवन भर संघर्ष करने वाला इंसान कम से कम अपनी अंतिम यात्रा में सम्मान का अधिकारी होता है, लेकिन बेहटा गुसाईं में हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपने परिजनों को विदा करने के लिए भी कीचड़ और जलभराव से जूझना पड़ रहा है। तस्वीर में दिखाई दे रहा यह दृश्य केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल है जो आज तक श्मशान तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित और पक्का रास्ता उपलब्ध नहीं करा सकी।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि श्मशान भूमि तक तत्काल पक्का मार्ग बनवाया जाए ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा इस तरह की पीड़ादायक परिस्थितियों में न निकालनी पड़े।
कीचड़ में डूबे इस रास्ते ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गांवों में विकास का असली चेहरा क्या है—कागजों में दर्ज योजनाएं या फिर अपने परिजनों को दलदल के बीच अंतिम विदाई देते ये मजबूर ग्रामीण?

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-12-28at122820
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at122213
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights