चतुरी नगला में 50 साल पुराना वाल्मीकि बस्ती का रास्ता बंद, ग्रामीणों में आक्रोश — राजस्व कार्रवाई पर उठे सवाल
मुजरिया (बदायूँ)। थाना मुजरिया क्षेत्र के ग्राम चतुरी नगला स्थित वाल्मीकि बस्ती के ग्रामीणों ने गांव के कुछ लोगों पर बस्ती के 50 वर्षों से अधिक पुराने मुख्य रास्ते को अवरुद्ध करने का गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में दर्जनों ग्रामीणों ने पहुंचकर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए तत्काल रास्ता खुलवाने की मांग की।ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता बस्ती का एकमात्र एवं मुख्य आवागमन मार्ग रहा है, जिसका उपयोग पिछले कई दशकों से निरंतर किया जा रहा था। आरोप है कि गांव के उमेश पुत्र करण सिंह तथा उनके पुत्र पंकज एवं भानु द्वारा लगभग 12 दिन पूर्व रास्ते को बंद कर दिया गया, जिससे बस्ती के लोगों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र रास्ता नहीं खुलवाया गया और किसी प्रकार की जनहानि अथवा अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों की होगी।थाना समाधान दिवस में मामले की सुनवाई के दौरान हल्का लेखपाल द्वारा खेतों के चकमार्ग की पैमाइश कर ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्ग सुझाने का प्रयास किया गया। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह वैकल्पिक व्यवस्था उनकी समस्या का समाधान नहीं है और स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया अधूरी रही तथा लेखपाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचने के बाद बिना ठोस समाधान किए वापस लौट आए। वहीं कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि फर्जी हस्ताक्षर कर मामले का निस्तारण दर्शाया गया है, जिससे उनमें आक्रोश व्याप्त है।इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दबंगों को स्थानीय प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष जांच नायब तहसीलदार स्तर से कराए जाने तथा वास्तविक पैमाइश कर स्थायी रूप से रास्ता खुलवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे जिला प्रशासन के समक्ष बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे और लेखपाल के खिलाफ भी मोर्चा खोलेंगे।















































































