बरेली के जिला अस्पताल में भीषण गर्मी में ओपीडी पर्चे के लिए घंटों धूप में तप रहे मरीज
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिला अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्थाएं खुद बीमार नजर आ रही हैं। आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच जिला अस्पताल में इलाज कराने आ रहे मरीजों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में ओपीडी का एक अदद पर्चा बनवाने के लिए बीमार महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों को तपती धूप में दो-दो घंटे तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। ग्राउंड जीरो पर हालात इतने बदतर हैं कि ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर मरीजों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए टिन शेड या शामियाने तक का कोई इंतजाम नहीं किया गया है, जिससे अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता और दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।भीषण गर्मी के इस दौर में जहाँ डॉक्टर लोगों को धूप और लू से बचने की सलाह दे रहे हैं, वहीं बरेली के इस मुख्य सरकारी अस्पताल में आकर लोग और ज्यादा बीमार होने को मजबूर हैं। पर्चा काउंटर पर घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रही एक बेबस महिला ने आँखों में आंसू और चेहरे पर बेबसी की मुस्कान लिए बताया कि वह आधे घंटे से अधिक समय से अपने बच्चे की दवाई के लिए लाइन में खड़ी है। धूप इतनी तेज है कि खड़ा होना दूभर है, लेकिन अभी तक उसका पर्चा भी नहीं बन पाया है और आगे कितना वक्त लगेगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है। यह स्थिति अस्पताल की धीमी कार्यप्रणाली और बदइंतजामी को साफ बयां करती है।अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे स्थानीय नागरिक विशाल सक्सेना ने यहाँ की अव्यवस्थाओं पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि वह अपने बुजुर्ग पिता और बड़े भाई को लेकर अस्पताल आए थे, लेकिन यहाँ सीनियर सिटीजन्स यानी वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई अलग लाइन नहीं बनाई गई है। हर वर्ग के लोग, चाहे वे बच्चे हों या बुजुर्ग, सब एक ही लंबी कतार में धूप में झुलसने को मजबूर हैं। मरीजों के तीमारदारों ने मांग की है कि इस भीषण गर्मी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन को तत्काल अतिरिक्त पर्चा काउंटर खोलने चाहिए या फिर इन काउंटरों को किसी पेड़ की छांव या सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना चाहिए ताकि धूप से राहत मिल सके।
घुटनों के दर्द से पीड़ित अपनी बुजुर्ग माँ की दवाई लेने आई बबीता नाम की महिला ने बताया कि वह पिछले एक घंटे से भटक रही हैं। पहले वह दूसरे काउंटर पर गईं जहाँ पर्चा नहीं बन सका और अब इस लंबी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। उनकी माँ दर्द के कारण खड़ी होने की स्थिति में भी नहीं हैं। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी अमान ने बताया कि वह पिछले डेढ़ घंटे से लाइन में खड़े हैं, जो हर 10 से 15 मिनट में महज दो-चार कदम ही आगे बढ़ पाती है। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ इतनी बुनियादी सुविधा भी नहीं है कि मरीजों के लिए एक टेंट या शामियाना लगा दिया जाए। जो मासूम बच्चे पहले से निमोनिया या तेज बुखार से पीड़ित हैं, वे इस जानलेवा धूप में खड़े रहकर और ज्यादा गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं। अस्पताल के भीतर की चिकित्सा सुविधाएं भले ही ठीक हों, लेकिन प्रवेश द्वार पर ओपीडी पर्चे की यह किल्लत पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती है। खास बात यह भी है कि बरेली के महाराणा प्रताप राजकीय जिला अस्पताल में सरकार की ओर से मरीजों की सहूलियत हेतु 10 काउंटर की व्यवस्था दी गई है । लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन की मनमानी के चलते महज तीन काउंटर के भरोसे ही जिले की 25 लाख जनता का इलाज किया जा रहा है। वही निरीक्षण के दौरान ढिन्होरा पीटने वाले राजनेता और अधिकारी भी निरीक्षण के नाम पर खाना पूरी करके ही वापस लौट जाते हैं फिलहाल बरेली के राजकीय जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं पूरी तरीके से चरमरा चुकी है और अब उन्हें खुद इलाज की जरूरत है। तो अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन मरीजो के सहूलियत के लिए कोई खास प्रबंध करता है या इनकी मनमानी का सिलसिला इसी तरीके से जारी रहेगा।















































































