अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अदाणी ग्रुप के कर्मयोगियों को दिया संदेश
मुंबई।।आज के दिन की शुरुआत गौतम अदाणी ने अपनी धर्मपत्नी प्रीति के साथ केदारनाथ धाम जाकर महादेव का पावन दर्शन किया।
उन्होंने कहा वहाँ हमने मिलकर भगवान से प्रार्थना की, कि उन्होंने मुझे इस महान देश भारत में जन्म दिया, और मुझे इस देश की सेवा करने का अवसर मिला,मुझे आप सबका स्नेह और विश्वास मिला, इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं। आज के दिन हमने ये भी प्रार्थना की, कि हमारा देश निरंतर प्रगति करता रहे, समृद्ध होता रहे, और आप सभी का जीवन सुख, शांति और स्वास्थ्य से भरा रहे। और वहीं हमने ये संकल्प भी लिया कि हम सब मिलकर, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ, और भी बड़े मकसद के लिए काम करेंगे।
अपने संबोधन में श्री गौतम अदाणी ने बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उद्घाटित गंगा एक्सप्रेसवे का भी जिक्र किया
गंगा एक्सप्रेसवे केवल 12 जिलों और 500 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है, बल्कि माँ गंगा की पावन धारा की तरह ही लोगों के जीवन को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है।
जैसे माँ गंगा सदियों से हमारी आस्था और संस्कृति का पोषण कर रही है, वैसे ही यह एक्सप्रेसवे विकास की नई धारा बनकर लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में परिवर्तन लाएगा।
मेरठ से प्रयागराज की यात्रा अब 10–11 घंटे से घटकर 5–6 घंटे में पूरी होगी। गंगा एक्सप्रेसवे की मजबूती ऐसी है कि ज़रूरत पड़ने पर इस पर फाइटर जेट भी उतर सकते हैं । यह नए भारत की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
माँ गंगा हमारी आस्था हैं, और गंगा एक्सप्रेसवे उसी आस्था को विकास से जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु है, जो न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।
इस अवसर पर देश विदेश के लाखों कर्मयोगी एक साथ जुड़े और श्री गौतम अदाणी का संबोधन सुना। उत्तर प्रदेश में लखनऊ एयरपोर्ट सहित अदाणी रोड बिजनेस, अदाणी पावर, अदाणी सीमेंट, अदाणी ग्रीन सहित अन्य कंपनियों के लोग अलग अलग स्थानों से श्री गौतम अदाणी का संबोधन सुना।
अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस 2026 पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी का संबोधन
मेरे प्रिय साथियों, नमस्कार।
“अपनी बात, अपनों के साथ” — इस संवाद का सिलसिला हम आज, 1 मई — विश्व श्रमिक दिवस के इस महत्वपूर्ण और पावन अवसर पर कर रहे हैं। मेरा मानना है, कि जीवन ‘कल, आज और कल’ की एक सतत यात्रा है, जहाँ हम अतीत से सीखते हैं, वर्तमान को समझते हैं और भविष्य को आकार देते हैं।
Adani Group की हमारी विकास यात्रा भी इसी सोच पर आधारित रही है, हर अनुभव, हर निर्णय और हर उपलब्धि, हमारी साझा सीख का हिस्सा है। एक परिवार के रूप में, यह जरूरी है कि हम इन सीखों और विचारों को खुलकर साझा करें, ताकि हम मिलकर, अपने व्यवसाय, अपने लोगों और सभी stakeholders को भविष्य के लिए और अधिक सक्षम व सशक्त बना सकें।
“अपनी बात, अपनों के साथ” — उसी भावना का एक प्रयास है, जहाँ समय समय पर संवाद के माध्यम से हम अपनी यात्रा को और स्पष्ट, सशक्त, सार्थक और सहभागी बनाएंगे।
आज, हमारा दिन है, हम सबका दिन है। हर वह शख्स जो मेहनतकश है, आज उसका दिन है। हर वो शख्स जिसका विश्वास मेहनत पर है, जो अपने पसीने की ताकत को समझता है, जो मुश्किलों से भागता नहीं, बल्कि उनसे जूझना जानता है, आज उसका दिन है।
जिसमें हिम्मत है, हौसला है, कुछ कर गुजरने का जज्बा है, आज का दिन उन सब का है। इसलिए, ये दिन मेरा दिन है, आपका दिन है, हम सबका दिन है।
आज, विश्व मजदूर दिवस है। आज, विश्व श्रमिक दिवस है। ये केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उस भावना का उत्सव है जो इंसान को अपने सपनों को साकार करने की शक्ति देता है।
और साथियों, मेरे लिए ये दिन एक और कारण से भी बहुत विशेष है।
1 मई 1986 को ही, आज से 40 साल पहले, मैं प्रीति के साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधा था, और मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के साथ जीवन का नया सफर शुरू किया था।
और आज के दिन की शुरुआत इससे बेहतर क्या हो सकती थी कि आज सुबह अपनी धर्मपत्नी प्रीति के साथ केदारनाथ धाम जाकर महादेव के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला।
वहाँ हमने मिलकर भगवान से प्रार्थना की, कि उन्होंने मुझे इस महान देश भारत में जन्म दिया, और मुझे इस देश की सेवा करने का अवसर मिला,मुझे आप सबका स्नेह और विश्वास मिला, इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं।
आज के दिन हमने ये भी प्रार्थना की, कि हमारा देश निरंतर प्रगति करता रहे, समृद्ध होता रहे, और आप सभी का जीवन सुख, शांति और स्वास्थ्य से भरा रहे। और वहीं हमने ये संकल्प भी लिया कि हम सब मिलकर, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ, और भी बड़े मकसद के लिए काम करेंगे।
हम एक ऐसे कालखंड में खड़े हैं जो असाधारण रूप से महत्वपूर्ण है। एक लंबे समय की गुलामी के बाद, 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ। आज उस स्वतंत्रता को लगभग अस्सी वर्ष होने को हैं, और आज हम अपने परिश्रम और पराक्रम से उस मुकाम पर खड़े हैं, जहाँ दुनिया भारत की तरफ उम्मीदों के साथ देख रही है।
ये एक ऐसा समय है जब हमारा हर प्रयास, केवल व्यक्तिगत या संस्थागत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का हो जाता है।
देश के सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने भारत की युवा शक्ति, उसकी ऊर्जा और उसकी संभावनाओं पर भरोसा करते हुए, 2047 तक, भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है।
लेकिन ये संकल्प किसी एक व्यक्ति, किसी एक संस्था, या किसी एक सरकार के प्रयास से पूरा नहीं होगा। इसके लिए 140 करोड़ देशवासियों को पूरी निष्ठा, पूरी ऊर्जा और पूरे समर्पण के साथ जुटना होगा। अदाणी समूह भी — इसी देश का हिस्सा है। इसलिए ये केवल हमारा अवसर नहीं, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस राष्ट्र को विकसित बनाने की यात्रा में अपना योगदान दें।
कुछ लोगों के मन में ये विचार आ सकता है कि इतने बड़े देश में, इतनी विशाल आबादी के बीच, मेरे अकेले के योगदान से क्या फर्क पड़ेगा? अगर मैं कुछ नहीं करूँ तो भी क्या हो जाएगा? इसी विचार के संदर्भ में मैं आपसे एक कथा साझा करना चाहता हूँ।
रामायण का एक प्रसंग हम सब जानते हैं। जब भगवान राम के नेतृत्व मेंपूरी वानर सेना समुद्र तट पर पहुँची और लंका तक सेतु बनाने का कार्य शुरू हुआ, तब बड़े-बड़े वानर और भालू विशाल पत्थरों को उठाकर समुद्र में डाल रहे थे। उसी समय — प्रभु राम और लक्ष्मण —उस कार्य को देखने पहुँचे…तो उन्होंने देखा कि एक छोटी-सी गिलहरी भी बार-बार समुद्र में जाती है, रेत में लोटती है, और फिर उस रेत को पुल में डाल देती है।
वह ये काम — बार-बार कर रही थी। जब उससे पूछा गया, “तुम क्याकर रही हो?” तो उसने पूरे आत्मविश्वास से कहा, “मैं भी अपना योगदानदे रही हूँ।”
जब उससे कहा गया कि इतने बड़े पत्थरों के सामने तुम्हारे इन छोटे-छोटे कणों से क्या फर्क पड़ेगा, तो उसका उत्तर बहुत गहरा था। “बड़ी बात येनहीं है कि मेरे इन रेत के कणों से कितना फर्क पड़ेगा, बड़ी बात ये है कि जब इतिहास लिखा जाएगा,
तो ये न कहा जाए कि मैंने अपना योगदान नहीं दिया।”
साथियों, यही भावना हम सबके भीतर होनी चाहिए। ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आपका योगदान कितना बड़ा है या छोटा। महत्वपूर्ण ये है कि आपने अपना योगदान दिया या नहीं। जब हम काम पर आते हैं, तो हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि हम केवल एक नौकरी कर रहे हैं। हमें ये समझना होगा कि हमारा हर काम राष्ट्र निर्माण से जुड़ा हुआ है। जब हम एक project पूरा करते हैं, तो हम सिर्फ एक काम नहीं करते, हम देश के भविष्य को आकार देते हैं।
इस बात को अगर समझना हो, तो मुंद्रा को देखिए। एक समय था जब वहाँ कुछ भी नहीं था। रेत थी, खाली ज़मीन थी। आज वही मुंद्रा भारत का सबसे बड़ा पोर्ट बन चुका है, देश के व्यापार को गति दे रहा है और भारत को दुनिया से जोड़ रहा है।
इसी तरह, केरलम का विझिंजम पोर्ट, भारत को global maritime map पर एक नई पहचान देगा और हमें एक मजबूत transshipment hub बनने की दिशा में आगे ले जाएगा।
और कच्छ में खावड़ा, जहाँ हम दुनिया के सबसे बड़े green energy projects में से एक बना रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की नींव रख रहा है।
और अब नवी मुंबई एयरपोर्ट, ये केवल एक airport नहीं है। ये हमारे देश का गौरव है, दुनिया के सबसे बेहतरीन airports में से एक है।
ये भारत की aviation capacity को नया आयाम देगा, connectivity को बढ़ाएगा और लाखों लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा। ये सिर्फ एक airport नहीं है, ये भारत की बढ़ती हुई ताक़त और क्षमता का प्रतीक है।
इसी क्रम में, आप सभी जानते हैं कि हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी जी ने उत्तर प्रदेश में गंगा Expressway जैसे ऐतिहासिक project का लोकार्पण किया है। यह Expressway केवल 12 जिलों और 500 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है, बल्कि माँ गंगा की पावन धारा की तरह ही लोगों के जीवन को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम है।
जैसे माँ गंगा सदियों से हमारी आस्था और संस्कृति का पोषण कर रही है, वैसे ही यह Expressway विकास की नई धारा बनकर लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में परिवर्तन लाएगा।
मेरठ से प्रयागराज की यात्रा अब 10–11 घंटे से घटकर 5–6 घंटे में पूरी होगी। गंगा Expressway की मजबूती ऐसी है कि ज़रूरत पड़ने पर इस पर Fighter Jets भी उतर सकते हैं । यह नए भारत की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
माँ गंगा हमारी आस्था हैं, और गंगा Expressway उसी आस्था को विकास से जोड़ने वाला एक मजबूत सेतु है, जो न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।
लेकिन साथियों, Adani Group ने एक और संकल्प लिया है जो शायद मेरे जीवन के सबसे कठिन कामों में से एक है, और मेरे दिल के सबसे करीब है। धारावी का पुनर्विकास। ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं है, ये शायद दुनिया के सबसे बड़े और सबसे चुनौतीपूर्ण मानवीय परिवर्तन का प्रयास है। मैंने ये जिम्मेदारी पूरी समझ के साथ ली है।
बेशक इसमें चुनौतियाँ बहुत हैं। ये फैसला हमने मुनाफे के लिए नहीं लिया। हमने ये जिम्मेदारी इसलिए ली है, क्योंकि धारावी कहीं न कहीं हम सबकी सामूहिक विफलता का प्रतीक रहा है।
वहाँ के लोगों की मेहनत, उनकी आगे बढ़ने की ताक़त, उनकी संघर्ष करने की शक्ति, हमेशा प्रेरक रही है। लेकिन हम, एक समाज के रूप में, उन्हें वह जीवन नहीं दे पाए…जिसके वे हकदार थे।
मैं इस स्थिति को बदलना चाहता हूँ। इसीलिए मैंने धारावी की चुनौती स्वीकार की।
ये सभी projects, जो मैंने बताये वे Adani Group के लिए गर्व और संतोष के साथ, राष्ट्र निर्माण में एक छोटा सा योगदान भी है। और आप सभी उस उपलब्धि की असली नींव हैं। इस मकसद में आपकी श्रमशक्ति को साधुवाद देता हूँ और आप सभी को नमन करता हूँ।
एक समय था जब मैं सिर्फ 20 लोगों के साथ मुंद्रा के लिए निकला था। सुबह 4 बजे अहमदाबाद से निकलते थे, मुंद्रा पहुँचते थे, और फिर पूरा हफ़्ता वहीं रहकर काम देखते थे। उस समय साइट पर 300 से 400 लोग ही हुआ करते थे। मैं लगभग हर साथी को जानता था नाम से, काम से, और उनके स्वभाव से भी। कौन कहाँ से आया है, कौन किस काम में expert है, ये सब मुझे मालूम रहता था।
आज 4 लाख से अधिक लोग रोज़ अदाणी समूह के साथ काम कर रहे हैं। ये देखकर गर्व भी होता है, ख़ुशी भी होती है, लेकिन मन में एक बात हमेशा रहती है कि मैं अपनी इच्छा के बावजूद अब हर साथी का नाम याद नहीं रख पाता।
लेकिन, मैं आपसे दिल से एक बात कहना चाहता हूँ — भले ही मैं हर नाम याद न रख पाऊँ, पर मेरे मन का रिश्ता आपसे आज भी वैसा ही है जैसा पहले था। संस्था का आकार बदला है, पर उसके संस्कार नहीं बदले हैं।
मेरी सोच हमेशा यही रही है कि अदाणी समूह सिर्फ नौकरी करने की जगह न बने, बल्कि ऐसा मंच बने — जहाँ मेहनत करने वाला व्यक्ति कदम-दर-कदम आगे बढ़ सके; जहाँ साधारण शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी एक दिन शिखर तक पहुँच सके।
जब हमने मुंद्रा में शुरुआत की थी, तब मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि ये कारवां इतना बड़ा हो जाएगा। ऐसे समय में मुझे हमेशा ये पंक्तियाँ याद आती हैं — “मैं अकेला ही चला था — जानिबे-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।”
आज ये कारवां 4 लाख से अधिक सहभागियों का हो चुका है। पहले 35 वर्षों में हमने मिलकर करीब 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी की थी। और आज स्थिति ये है कि इस एक साल में ही हम 2 लाख करोड़ रुपये की नई संपत्ति जोड़ने जा रहे हैं। ये सिर्फ नंबर नहीं है — ये आप सबकी मेहनत का नतीजा है।
पिछले कुछ महीनों में मैंने अलग-अलग साइट्स का दौरा किया है। विमान, हेलीकॉप्टर और सड़क हर माध्यम से मैंने 1 लाख किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की है। हज़ारों सहभागियों से मुलाकात की है। इन मुलाकातों के बाद मेरे मन में एक बात बिल्कुल साफ़ हो गई है — अगर हमें अपनी गति बनाये रखनी है और भविष्य को और मजबूत बनाना है, तो हमें कुछ बुनियादी बातों पर पूरे संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
इन्हीं अनुभवों के आधार पर, हमने तीन बड़े बदलाव, तीन बड़े Transformations पर काम शुरू किया है जिसके तीन स्तंभ हैं।
पहला स्तंभ है — 3-layer मॉडल। जैसे-जैसे संस्था बड़ी होती है, फैसले धीमे होने लगते हैं, और किसी बात को एक स्तर से दूसरे स्तर तक पहुँचने में समय लगने लगता है। हम ऐसा नहीं होने देना चाहते।
Three-layer मॉडल का मकसद है संगठन को और flat बनाना, ताकि जिम्मेदारी स्पष्ट हो, और फैसले जल्दी लिए जा सकें। जब layers कम होते हैं, तो फैसले तेज़ होते हैं, काम की गति बढ़ती है, और पूरी संस्था में एक नई ऊर्जा आती है। आज की दुनिया में फर्क कई बार capability का नहीं, speed का होता है।
हम चाहते हैं कि site पर जो decision 3 दिन में होता है, वह 3 घंटे में हो। और इसका एक और बड़ा फायदा है। जब organisation flat होता है, तो युवा सहभागियों को जल्दी मौका मिलता है। हमारे पास बहुत सारे young engineers, supervisors और managers हैं। उनके अंदर ऊर्जा है, नए विचार हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें मौका दें — जल्दी सीखने का, जल्दी आगे बढ़ने का और जिम्मेदारी लेने का।
दूसरा स्तंभ है — Partnership मॉडल। आज अदाणी समूह की असली ताक़त हमारे लोग हैं — हमारे employees भी और हमारे partners भी। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरा अधूरा है। हमारे employees काम को दिशा देते हैं, और हमारे partners —contractors, suppliers, vendors — उसी काम को ज़मीन पर उतारते हैं, उसे गति देते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे हमने अपने काम को बढ़ाया, एक चुनौती सामने आई।आज कई sites पर 100 से ज़्यादा contractors एक साथ काम कर रहे हैं। इतने लोगों को coordinate करने के लिए एक अलग व्यवस्था बनानी पड़ती है। उसमें समय लगता है, layers बढ़ती हैं, और फैसले धीमे हो जाते हैं। हम इसे बदलना चाहते हैं।
हमारा प्रयास है कि हम कुछ मजबूत और सक्षम partners के साथ काम करें जो पूरे काम की जिम्मेदारी लेकर उसे बेहतर, तेज़ और असरदार तरीके से पूरा कर सकें। इससे coordination आसान होगा, layers कम होंगी, जिम्मेदारी स्पष्ट होगी,
और काम की गति बढ़ेगी।
लेकिन Partnership मॉडल सिर्फ structure बदलने की बात नहीं है। ये बदलाव सोच का है, ये बदलाव culture का है। ये हमारा commitment है कि हम अपने partners के साथ शुरुआत से लेकर अंत तक खड़े रहेंगे।उनको सफल कराना हमारी जिम्मेदारी है।
मुझे हमारे एक partner, Hadhubhai Rabari, की कहानी याद आती है। वे हमारे प्लांट के पास वांढ गांव से आते हैं। पहले, उनके परिवार और पूरे गांव का पुश्तैनी काम ऊँट चराना और दूध बेचना था। 2008 के आसपास, जब हमारे अदाणी पावर प्लांट का निर्माण चल रहा था, तब गाँव में लोगों की सोच प्लांट के पास छोटे-छोटे काम करने तक सीमित थी।
लेकिन 2016 में, हमारे सोलर प्रोजेक्ट के दौरान, Hadhubhai ने — एक कदम आगे बढ़ाया। हमने उन्हें पानी सप्लाई करने का एक कॉन्ट्रैक्ट दिया। शुरुआत उन्होंने लोन लेकर एक पुराने पानी का टैंकर से की। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम को समझा, समय पर काम पूरा किया और अपने ऊपर भरोसा बनाया।
आज उनकी कंपनी एक मजबूत व्यवसाय बन चुकी है। उनके पास कई Hydra मशीनें हैं, बड़ी cranes हैं, और अन्य equipment हैं। वे आज बड़े कामों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लेकिन मेरे लिए बड़ी बात ये नहीं है। सबसे बड़ी बात ये है कि उनकी इस यात्रा ने पूरे गांव की सोच बदल दी। आज उसी गांव के कई लोग नए-नए कामों में अदाणी ग्रुप के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
और Hadhubhai अकेले नहीं हैं। ऐसी कई कहानियाँ हैं जहाँ लोगों ने हमारे साथ काम करते-करते अपने भीतर के उद्यमी को पहचाना, अपना काम बढ़ाया, और एक नई पहचान बनाई।
यही है Partnership मॉडल का मकसद। हम सिर्फ projects पूरे नहीं करना चाहते, हम लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि इस model के ज़रिये से system में entrepreneurship की ऊर्जा आए और ऐसे सैकड़ों लोग तैयार हों, जो आगे बढ़ें और दूसरों को भी आगे बढ़ाएँ।
तीसरा स्तंभ है — Learning and Development. अगर हमें काम में गति लानी है, अगर हमें मजबूत partnerships बनानी हैं, तो सबसे जरूरी है हमारे लोग सीखते रहें। हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने का एक साफ़ रास्ता हो — जहाँ कोई unskilled है, तो वह semi-skilled बने, semi-skilled से skilled बने, और आगे चलकर supervisor, manager या leader बने। चाहे कोई fitter हो, crane operator हो, technician हो, या साइट पर काम करने वाला कोई भी साथी हर किसी के लिए आगे बढ़ने का मौका होना चाहिए।
इस बात पर मुझे सुब्बू की कहानी याद आती है। सुब्बू ने हज़ीरा पोर्ट में एक श्रमिक के रूप से काम शुरू किया था। लेकिन उनके अंदर हमेशा सीखने की इच्छा रही।
उन्होंने छोटे-छोटे सुझावों से शुरुआत की, फिर ट्रेनिंग ली, टेक्नोलॉजी सीखी, और धीरे-धीरे अपने काम को और बेहतर बनाते गए।
एक श्रमिक से शुरू करके, सुपरवाइजर बनना, फिर इनोवेशन मैनेजर बनना, और आज कॉर्पोरेट ऑफिस में योगदान देना। आज उनकी यात्रा एक मिसाल है लेकिन ये कहना ज़रूरी है कि सुब्बू सिर्फ एक व्यक्ति नहीं है, सुब्बू एक सोच है। मैं चाहता हूँ कि आप में से हर व्यक्ति ये सोचे, “मैंभी सुब्बू बन सकता हूँ।” आप में से हर एक के अंदर वह क्षमता है।इसीलिए हम Adani Skill Centers बना रहे हैं, जहाँ हर व्यक्ति के लिए सीखने और कौशल बढ़ाने की व्यवस्था होगी और टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी हम ये ensure करेंगे कि हर साथी को सीखने का और आगे बढ़ने का मौका मिले चाहे वह कहीं भी काम कर रहा हो।
साथियों, ये तीनों बदलाव — 3-layer model, Partnership Model, और Learning & Development — ये अलग-अलग नहीं हैं। ये एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। इसलिए इन तीनो को ही लागू करना ज़रूरी है।
इन्हें आप त्रिवेणी संगम की तरह समझिए। गंगा, यमुना और सरस्वती,तीनों नदियाँ अलग-अलग हैं, लेकिन जब वे संगम में मिलती हैं, तभी उनका महत्व और शक्ति बढ़ जाती है।
साथियों, इन तीनों बदलावों के साथ-साथ, कुछ ऐसी बुनियादी बातें भी हैं जिन पर हम हमेशा से विश्वास करते आए हैं, और जिन पर आगे भी उतनी ही मजबूती से काम करेंगे। इन्हें आप हमारी संस्था का पंचतत्व कह सकते हैं। जैसे प्रकृति पंचतत्व से मिलकर बनी है, वैसे ही एक मजबूत संस्था भी कुछ मूल तत्वों पर खड़ी होती है।
पहला तत्व है — स्थानीय लोगों को प्राथमिकता। हमारा मानना है कि जहाँ हम काम करें, वहाँ की मिट्टी, वहाँ के लोग — और वहाँ के सपने भी — हमारे साथ आगे बढ़ें। इसलिए, हमारा प्रयास रहता है कि सबसे पहले local area से लोगों को अवसर मिले, फिर राज्य के भीतर से, और उसके बाद ही बाहर से। और कुछ विशेष परिस्थितियों में, जहाँ locally लोग नहीं मिल पाते, वहाँ हमारे partners बेहतर जानते हैं कि सही लोगों को कहाँ से लाया जाए।
दूसरा तत्व है — skill और training. दुनिया और काम, दोनों बदल रहे हैं। आगे रहने के लिए लोगों को लगातार सीखने का अवसर देना जरूरी है। इसीलिए हम training programs और Adani Skill Centres जैसे प्रयास कर रहे हैं।
तीसरा तत्व है — career की स्पष्ट प्रगति। हम एक ऐसा cadre बनाना चाहते हैं
जहाँ लोग युवा अवस्था में जुड़ें, सीखते रहें, और इसी संस्था के साथ आगे बढ़ते रहें — unskilled से semi-skilled, skilled, supervisor, manager और leadership तक — एक स्पष्ट यात्रा हो। मैं चाहता हूँ की जल्द ही ऐसा समय आए कि Adani Group में lateral hiring पूरी तरह से बंद हो जाए और हम सिर्फ़ home grown talent पर भरोसा करें। ये सिर्फ एक career path नहीं है, ये पूरे भरोसे की यात्रा है।
चौथा तत्व है — उचित और competitive salary. मेहनत का सम्मान होना चाहिए। भुगतान उचित होना चाहिए, और भुगतान समय पर होना चाहिए। हर साथी को ये भरोसा होना चाहिए कि उसकी मेहनत, उसकी निष्ठा और उसके योगदान का
उचित सम्मान हो रहा है।
पाँचवा तत्व है गरिमा के साथ जीवन। हमारे बहुत सारे साथी दूर-दराज़ की मुश्किल sites पर काम करते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद, उन्हें साफ-सुथरा रहने का स्थान, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। ये कोई सुविधा नहीं है, ये एक आवश्यकता है। ये हर मेहनतकश का अधिकार है।
इसलिए हम Mundra और Khavda में लगभग 50,000 सहयोगियों के लिए airconditioned आवास बना रहे हैं और हमारे सहयोगियों के लिए Mundra में एक विशाल cloud kitchen बना रहे हैं, जहाँ प्रतिदिन एक लाख की मात्रा में स्वच्छ, स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन मिलेगा।
मेरे प्रिय सहयोगियों, जैसे पांडव पाँच थे, और हर एक की अपनी अलग ताक़त थी, युधिष्ठिर में सत्य और धैर्य था, भीम में शक्ति थी, अर्जुन में कौशल था, नकुल और सहदेव में संतुलन और ज्ञान था।
लेकिन उनकी असली शक्ति उनके साथ होने में थी, वैसे ही हमारी संस्था का ये पंचतत्व है। ये पाँचों तत्व मिलकर ही एक मजबूत, संवेदनशील और आगे बढ़ती हुई संस्था बनाते हैं।
सहयोगियों, हमारी हर site एक mini India है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग, अलग-अलग भाषा, अलग-अलग संस्कृति, अलग-अलग परिवेश लेकिन सब एक साथ काम कर रहे हैं। कोई उत्तर प्रदेश से है, कोई बिहार से है, कोई वेस्ट बंगाल से है, कोई केरलम से है, कोई ओडिशा से है, कोई गुजरात से है — लेकिन जब वे site पर होते हैं, तो उनकी पहचान सिर्फ एक होती है — हम सब अदाणी समूह के साथी हैं,और हम सब भारतीय हैं।
और जब लाखों लोग इस भावना के साथ काम करते हैं, तो हम सिर्फ projects नहीं बनाते, हम देश बनाते हैं। इसलिए मैं मानता हूँ — आप सिर्फ श्रमिक नहीं हैं। आप सिर्फ कर्मचारी नहीं हैं। आप सिर्फ अधिकारी नहीं हैं। आप राष्ट्र निर्माता हैं।
आइए, इस श्रमिक दिवस पर हम ये संकल्प लें कि हम अपने काम कोसिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि — राष्ट्र निर्माण में योगदान मानेंगे।















































































