बरेली। पीलीभीत के ग्राम एवं पोस्ट जोगरॉयपुर निवासी 50 वर्षीय नगमा किन्नर इस साल हज यात्रा पर जा रही हैं। अपने जीवन के सबसे बड़े संकल्प को पूरा करते हुए नगमा अब हज का फर्ज अदा करेंगी। नगमा किन्नर की यह यात्रा न केवल उनकी व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह दृढ़ निश्चय की एक प्रेरणादायक कहानी भी है। दो वर्षों की बचत से पूरा किया सफर का प्रबंध नगमा ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से हज यात्रा पर जाने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई को जोड़कर इस पवित्र सफर का इंतेज़ाम किया। नमाज़, रोज़े और रमज़ान में तराबीह की पाबंदी के साथ उन्होंने हमेशा अल्लाह से हज पर जाने की दुआ की थी। अब उनका वह सपना सच होने जा रहा है। बरेली हज सेवा समिति ने दी ट्रेनिंग हज यात्रा की तैयारियों के सिलसिले में नगमा बरेली पहुंचीं। यहां उन्होंने बरेली हज सेवा समिति के माध्यम से अपनी जरूरी प्रक्रिया पूरी की। बरेली हज सेवा समिति के पम्मी ख़ाँ वारसी से नगमा किन्नर ने फोन पर राब्ता करके मुलाकात की।नगमा किन्नर किन्नर समाज से है। प्रशिक्षण: बरेली हज सेवा समिति के पम्मी ख़ाँ वारसी और हज ट्रेनर हाजी यासीन कुरैशी ने नगमा को हज के पांच दिन के अरकान (नियम), एहराम बांधने का तरीका और हज से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का प्रशिक्षण दिया। प्रक्रिया: उन्होंने शिविर में आकर टीकाकरण करवाया और अपनी मेडिकल बुक प्राप्त की। देश की तरक्की और भाईचारे के लिए मांगेंगी दुआ नगमा किन्नर का कहना है कि उनके दिल में देश और देशवासियों के लिए बहुत सम्मान है। उन्होंने कहा, “मैं काबे शरीफ़ और मदीने शरीफ़ जाकर अपने लिए ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की तरक्की और यहां के भाईचारे को बनाए रखने के लिए ख़ुसूसी दुआ करूंगी।” नगमा की इस यात्रा ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि यदि इंसान का इरादा नेक हो और मन में दृढ़ संकल्प हो, तो हर कठिन रास्ता आसान हो जाता है।