बदायूं में डिजिटल लोकतंत्र की नई पहल, एमएलसी वागीश पाठक सीधे जनता से मांग रहे विकास प्रस्ताव

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बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में इन दिनों एक जनप्रतिनिधि की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। बदायूं से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) वागीश पाठक ने विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक नई डिजिटल पहल शुरू की है। इस पहल के तहत वे सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक के माध्यम से क्षेत्र की जनता से सीधे विकास कार्यों के प्रस्ताव मांग रहे हैं।
एमएलसी वागीश पाठक का यह प्रयास पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नई सोच को दर्शाता है, जिसमें जनता केवल मतदाता नहीं बल्कि विकास प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बन रही है। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट जारी कर क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अपने इलाके की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के सुझाव दें।

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इस पहल का सबसे चर्चित उदाहरण बिसौली विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एमएलसी ने जनता से यह सवाल पूछा कि क्षेत्र के विकास के लिए बाईपास सड़क अधिक जरूरी है या ओवरब्रिज। इस सवाल ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का रूप ले लिया। महज 24 घंटे के भीतर हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं और अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार सुझाव साझा किए।
विशेष बात यह रही कि इस चर्चा में युवाओं की भागीदारी काफी अधिक देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवाओं ने पहली बार खुद को किसी विकासात्मक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा महसूस किया। कई लोगों ने इसे लोकतंत्र के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।एमएलसी वागीश पाठक का कहना है कि सरकार जनता की होती है और जनता से बेहतर कोई यह नहीं बता सकता कि उसे किस तरह के विकास कार्यों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य है कि बजट का उपयोग सही दिशा में हो और वही कार्य प्राथमिकता में आएं, जिनकी वास्तविक आवश्यकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से हमें सीधे जनता की आवाज सुनने का अवसर मिल रहा है।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्राप्त सभी सुझावों को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जाएगा और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव के रूप में तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि जनभावनाओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति मिल सके।
एमएलसी की इस पहल को जनपद में व्यापक समर्थन मिल रहा है। आम नागरिकों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी इस कदम की सराहना की है। लोगों का कहना है कि यह पहल न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा देती है, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधि के बीच संवाद को भी मजबूत करती है।युवाओं में इस पहल को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अब तक विकास कार्यों के निर्णय बंद कमरों में लिए जाते थे, लेकिन पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने सीधे जनता से उनकी राय जानने की पहल की है। इससे उन्हें यह महसूस हो रहा है कि उनकी आवाज भी मायने रखती है।एमएलसी वागीश पाठक अक्सर अपने संबोधनों में यह कहते हैं कि बदायूं का हर व्यक्ति उनके परिवार का सदस्य है और परिवार के हर सदस्य की समस्या को दूर करना ही उनका लक्ष्य है। उनकी यह सोच अब उनकी कार्यशैली में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए जनता से सीधे संवाद स्थापित करने का यह तरीका आने वाले समय में अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। इससे न केवल विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि योजनाओं का चयन भी अधिक प्रभावी और जनहितकारी हो सकेगा।
कुल मिलाकर, बदायूं के एमएलसी वागीश पाठक की यह पहल उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है, जहां जनता केवल दर्शक नहीं बल्कि विकास की भागीदार बन रही है।

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