बरेली। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के आंवला सांसद नीरज मौर्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को अब तक लागू न किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनगणना और परिसीमन का बहाना क्यों बनाया जा रहा है। सांसद मौर्य ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं के लिए केवल 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि उनकी आधी आबादी के हिसाब से 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण में स्पष्ट कोटा तय करने की मांग की। उन्होंने सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाते हुए उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जातियों के कथावाचकों के अपमान का भी जिक्र किया। जनसंख्या और संसाधनों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सांसदों की संख्या बढ़ाने से संसद की कार्यवाही प्रभावित होगी और सरकारी खर्च बढ़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संसाधनों का उपयोग गरीबों, किसानों, युवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाना चाहिए। सरकार से सवाल करते हुए मौर्य ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत आरक्षण को तेजी से लागू किया गया, जबकि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को लंबित रखा गया है। उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्ट समय-सीमा तय करने, जनगणना और परिसीमन की रूपरेखा घोषित करने तथा जातीय जनगणना कराने की मांग की। सांसद ने जोर देकर कहा कि जब तक पूरी जनगणना नहीं हो जाती, तब तक आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हो पाएगी।