बरेली। नाथ नगरी बरेली सोमवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनी, जब लगभग 1000 वर्ष बाद सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेषों का भव्य आगमन त्रिबटी नाथ मंदिर में हुआ। इस दौरान पूरा शहर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया।यह आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। श्री श्री रवि शंकर के निर्देशन में बेंगलुरु आश्रम से स्वामी भव्यतेज जी इन पावन अवशेषों को लेकर देशव्यापी यात्रा करते हुए बरेली पहुंचे। यह यात्रा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों से होकर गुजरी, जो राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बनी। सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और दर्शन का लाभ उठाया। आयोजन के दौरान आर्ट ऑफ लिविंग की प्रतिनिधि श्वेता कुनार ने इसे 1000 वर्षों की आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया।मंदिर ट्रस्ट के नवीन गोयल ने जानकारी दी कि वर्ष 1026 ईस्वी में हुए आक्रमण के बावजूद आस्था की ज्योति कभी नहीं बुझी और इन अवशेषों को सुरक्षित रखा गया। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि 2025 के अवसर पर इन्हें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर को सौंपा गया था।कार्यक्रम में सांसद, मेयर उमेश गौतम, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, व्यापारी नेता विशाल मेहरोत्रा, छत्रपाल गंगवार समेत कई गणमान्य व्यक्ति और संत-महंत मौजूद रहे। आर्ट ऑफ लिविंग बरेली के स्वयंसेवकों ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।यह ऐतिहासिक आयोजन न केवल बरेली बल्कि पूरे देश में आध्यात्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देकर गया।