बरेली। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर एक अप्रैल को काला दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने काले फीते, बैज और काली कमीज पहनकर यूनियन बैंक की मुख्य शाखा के सामने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता मुकेश सक्सेना ने की। सभा को संबोधित करते हुए मुकेश सक्सेना ने कहा कि एक अप्रैल के दिन ही पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त की गई थी और अब इसी दिन से मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स लागू किए जा रहे हैं, जिसके विरोध में देशभर के कामगार काला दिवस मना रहे हैं। यूनाइटेड फोरम के अध्यक्ष पी.के. माहेश्वरी ने कहा कि इन लेबर कोड्स के लागू होने से कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती होगी, काम के घंटे बढ़ेंगे और न्यूनतम वेतन जैसे कानून कमजोर पड़ जाएंगे। ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के उपाध्यक्ष डी.सी. मौर्य ने आरोप लगाया कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं, जिससे मजदूरों और कर्मचारियों के हितों को गंभीर नुकसान होगा। अटेवा के डॉ. मुनीश गंगवार ने पुरानी पेंशन बहाली और एनपीएस समाप्त करने की मांग दोहराई। महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि ये लेबर कोड कामगारों की आजादी छीनने वाले हैं और इनके खिलाफ व्यापक आंदोलन जारी रहेगा। किसान संगठनों की ओर से हिमांशु ने भी समर्थन जताते हुए लेबर कोड्स को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन को डॉ. अंचल अहेरी, राजेंद्र सिंह, सोहन कुमार, जितेंद्र मिश्रा, सर्वेश मौर्य, अरविंद देव सेवक, मोहित देवल, ललित चौधरी, मो. फैसल, अनुज शुक्ला, वी.के. सक्सेना और अफाक अहमद सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।