बदायूँ। उझानी रोड स्थित श्री संकटमोचन बालाजी दरबार में श्री संकटमोचन बालाजी महाराज की असीम कृपा से आयोजित श्री राम कथा का दिव्य एवं भव्य आयोजन निरंतर जारी है। गुरुजी स्व. श्री हरिश चन्द्र जी महाराज के आशीर्वाद तथा रविकान्त उपाध्याय (गुरुजी) के सानिध्य में यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहा है। कथा का वाचन पं. दिनेश मोहन शास्त्री द्वारा किया जा रहा है। कथा के चतुर्थ दिवस पर रामचरित मानस के अंतर्गत हनुमान मिलन एवं भरत मिलाप जैसे अत्यंत मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्री राम की वन यात्रा के दौरान माता सीता के हरण के पश्चात उनकी खोज में श्री राम का मिलन श्री हनुमान जी से किष्किन्धा के समीप ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ। हनुमान जी ने ब्राह्मण वेश में श्री राम और लक्ष्मण से भेंट कर उनका परिचय प्राप्त किया और उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर सुग्रीव के पास ले गए, जहां राम-सुग्रीव की मित्रता स्थापित हुई। वहीं भरत मिलाप प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि चित्रकूट में हुआ यह मिलन रामचरित मानस का सबसे भावुक प्रसंग है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस प्रसंग में श्री राम और भरत के निष्कलंक प्रेम, त्याग और भाईचारे का अद्भुत चित्रण किया है। कथा के अनुसार दोनों भाइयों के मिलन से पत्थर तक पिघल उठे थे। भरत जी का निस्वार्थ प्रेम, त्याग और आज्ञाकारिता सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर प्रतिमा शर्मा, विनय रस्तोगी, बरखा रस्तोगी, अमित पाठक, अमित गुप्ता, ईश्वर चन्द्र बाष्णेय, मितांशु, बवली, नीरु, वत्सल, सुधांशु, शिखा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।