शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद एक अप्रैल को मनाएंगे काला दिवस के रूप मे
बरेली। 1 अप्रैल 2005 का दिन प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लिए एक काला अध्याय के रूप में याद किया जाता है, जब पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी गई। इस निर्णय के विरोध में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद, बरेली द्वारा 1 अप्रैल को “काला दिवस” मनाने की घोषणा की गई है।
परिषद के जिलाध्यक्ष हरी शंकर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जनपद के शिक्षणेत्तर कर्मचारी काली पट्टी बांधकर और काले बिल्ले लगाकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुरानी पेंशन बहाली की मांग को बुलंद करेंगे।
जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने कहा कि 1 अप्रैल 2005 को पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर कर्मचारियों के भविष्य के साथ अन्याय किया गया। पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित और सुरक्षित जीवन प्रदान करती थी, जबकि नई पेंशन योजना पूरी तरह बाजार आधारित होने के कारण अनिश्चितताओं से भरी हुई है। इससे कर्मचारियों में असुरक्षा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन की कोई गारंटी न होने के कारण कर्मचारी मानसिक तनाव में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में पुरानी पेंशन योजना की बहाली ही कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन दे सकती है। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल एक दिन का विरोध नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के हक और अधिकारों की लड़ाई है। काला दिवस के माध्यम से सरकार को यह संदेश दिया जाएगा कि कर्मचारी अब चुप नहीं बैठेंगे और अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चार लेबर कोड्स और अन्य कर्मचारी विरोधी नीतियों के कारण कर्मचारियों में व्यापक आक्रोश है। यदि सरकार ने जल्द ही पुरानी पेंशन बहाली की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। परिषद ने जनपद के सभी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों से अपील की है कि वे 1 अप्रैल को काला दिवस के अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाएं। अंत में जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य की लड़ाई है, जिसमें सभी का सहयोग आवश्यक है। पुरानी पेंशन बहाली तक यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।














































































