स्वामी शुकदेवानंद कालेज में नवरात्रि पर संगीत, श्रद्धा और लोक संस्कृति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए
शाहजहांपुर।।स्वामी शुकदेवानंद कालेज में नवरात्रि के शुभारंभ पर संगीत, श्रद्धा और लोक संस्कृति से ओत-प्रोत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, प्रबंध समिति के सचिव प्रो. अवनीश मिश्रा एवं प्राचार्य प्रो आर के आजाद ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया। छात्रा काजल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया। संगीत विभाग की छात्राओं नेहा तिवारी एवं शिवांगी प्रजापति ने रोली, चंदन व पुष्प कलिकाओं से अतिथियों का स्वागत किया। अतिथियों का अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान प्रो. आदित्य सिंह, डॉ. श्रीकांत मिश्रा, डॉ. बलवीर शर्मा, डॉ. रामशंकर पाण्डेय एवं डॉ. दीपक सिंह ने किया। संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कविता भटनागर ने स्वागत उदबोधन देते हुए विषय स्थापना की।

डॉ. प्रतिभा सक्सेना के देवी गीत एवं लांगुरिया लोकगीतों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत लोकगीतों ने क्षेत्रीय विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्भुत चित्र प्रस्तुत किया। हिंदी विभाग की प्रस्तुति “आज मिथिला नजरिया…” ने मिथिला अंचल की लोकभावना को जीवंत किया, वहीं समाजशास्त्र विभाग ने “उड़ जाय रे उड़ जाय रे” के माध्यम से लोकजीवन की उड़ान को स्वर दिया। मनोविज्ञान विभाग की “पीपल के पात झड़े” प्रस्तुति ने संवेदनाओं की गहराई को छुआ, जबकि कला विभाग ने “है करेले से कड़वी हमारी ननदी” के माध्यम से हास्य-व्यंग्य से भरपूर लोक रंग बिखेरा। पूर्व छात्रा आरती ने “कोयल बिन बगिया ना सोभे राजा” ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संजीत कुमार ने”अंगना में ठाड़ी चार गुइयां” लोक गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया । इस मौके पर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने अपने आशीर्वचनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संगीत की महत्ता पर प्रकाश डालते विद्यार्थियों को निरंतर साधना के लिए प्रेरित किया। आभार संयोजक डॉ. प्रतिभा सक्सेना ने व्यक्त किया एवं संचालन व्याख्या सक्सेना ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के साथ हुआ। इस मौके पर उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल, प्रो. आलोक मिश्रा, प्रो मधुकर श्याम शुक्ला,प्रो प्रभात शुक्ला, डा.आलोक कुमार सिंह, डा बरखा सक्सेना,सुयश सिन्हा,डा विकास खुराना, डा पूनम दोहरे, डा प्रतिभा शर्मा,डा सचिन खन्ना, सहित तमाम शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र छात्राएं मौजूद रहे।














































































