बरेली में निजी अस्पताल की लापरवाही से मरीज की मौत, पीड़िता धरने पर
बरेली। बरेली के निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ और आर्थिक लूट का एक भयानक मामला सामने आया है। ग्राम झिंझरी निवासी पीड़िता लक्ष्मी देवी के पति स्व. उर्वेश को 25 सितंबर 2025 को सनराइज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के डॉ. रेहान अहमद और मैनेजर सुहैल खान की कथित लापरवाही और जानबूझकर उपेक्षा के कारण उर्वेश की 2 अक्टूबर 2025 को मृत्यु हो गई।पीड़िता का आरोप है कि इलाज के दौरान उनसे 5,50,000 रुपये ठगे गए, जबकि बाद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बरेली की जांच टीम ने केवल 2,70,093 रुपये वापस कराने का आदेश दिया। बावजूद इसके, अस्पताल के संचालक और डॉक्टर अब तक बेखौफ बच रहे हैंलक्ष्मी देवी ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मालिकों ने अदालत में जमानत के लिए पुलिस और प्रशासन से मिलीभगत की, और यह दिखाता है कि न्याय प्रक्रिया को गंभीर रूप से ताला लगाया गया है।इस घोर लापरवाही और आर्थिक शोषण को देखते हुए पीड़िता और मृतक के परिवार ने 18 मार्च 2026 से सेठ दामोदर पार्क, कमिश्नरी के पास धरना शुरू किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस और प्रशासन तुरंत कार्रवाई नहीं करेंगे, तो वे मुख्यमंत्री आवास, कालीदास मार्ग लखनऊ तक अनिश्चितकालीन धरना देने को मजबूर होंगी।इस मामले की कुछ भयंकर तथ्य ये हैं कि मरीज की मृत्यु अस्पताल की जानबूझकर उपेक्षा और लापरवाही के कारण हुई।
परिवार से 5,50,000 रुपये ठगे गए, आधी राशि ही वापस की गई।मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच में दोष सिद्ध हुआ, फिर भी गिरफ्तारी नहीं।अस्पताल के मालिक और डॉक्टर ने अदालत में जमानत लेने के लिए मोलभाव किया, न्याय प्रक्रिया को ठेंगा दिखाया।
पीड़िता ने धरना देकर स्पष्ट किया कि ऐसे अस्पतालों को खुली छूट नहीं दी जाएगी।
अगर देखा जाए तो बरेली के कुछ निजी अस्पताल मरीजों की जान और परिवार की मेहनत की कमाई के साथ खेल रहे हैं, और प्रशासन की लापरवाही इन अपराधों को बढ़ावा दे रही है।पीड़िता ने साफ संदेश दिया है कि “हम अपने प्रियजन की मौत और आर्थिक ठगी को सहन नहीं करेंगे। दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और अस्पताल को सील कर बंद किया जाए।”














































































