बदायूं के गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर होली मिलन समारोह और विराट कवि सम्मेलन हुआ
बदायूं : गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर होली मिलन समारोह और विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। फाग गीत गाए, अबीर-गुलाल लगाया और जमकर फूलों वर्षा हुई। यूपीएससी में 235 वीं रैंक प्राप्त करने वाले आयुष पाठक के पिता प्रमोद पाठक, दादी और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।
परिव्राजक सचिन देव ने वेदमंत्रोच्चार कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। उन्होंने कहा कि मधुर व्यवहार से घर मंदिर बन जाता है। धरती पर स्वर्ग तक का अवतरण होता है। जोन समन्वयक नजीबाबाद डीपी सिंह, स्काउट संस्था के प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिला मुख्यायुक्त सक्सेना, पूर्व जिला मुख्य आयुक्त डा.वीरपाल सिंह सोलंकी (डाक्टर कल्लू), पूर्व जेल अधीक्षक विनय कुमार दुबे, मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्रनाथ शर्मा, जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा, सुखपाल शर्मा ने संयुक्त रूप से मां गायत्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मातृशक्तियों और देव का न्याय होने होली मिलन समारोह के दौरान फाग गीत गए और फूलों की वर्षा कर एक दूसरे के गले मिलकर शुभकामनाएं दी।
इसके बाद अखिल विश्व गायत्री परिवार और हिन्दी साहित्य सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन का सरस्वती वंदना से शुभारंभ हुआ।
कवि शैलेंद्र मिश्रा देव ने कहा कि – मिल जाए कोई अपना तो होली है। मीठा बोले जब रसना तो होली है। दिल में हो अरमान कभी कुछ मिलने के पूरा हो जाए सपना तो होली है।
डा. शैलेंद्र कबीर ने यूं कहा कि- सच बयां करने की हिम्मत ही नहीं है जिनमें, वे कुछ भी होंगे कलमकार नहीं हो सकते।
सुनील शर्मा समर्थ ने कहा कि- क्यों न हम प्यार की करें बातें, मन से मनोहर की करें बातें। डालकर रंग एक दूजे पर, क्यों न अधिकार की करें बातें।
पवन विशेष ने कहा कि – आज सुन के बात मेरी कोई दंग न होता, मुख से मेरे कोई भी ऐसा व्यंग न होता। इतिहास के पन्नों को पढ़कर देखा आईना, हम भी नमाजी होते जो भगवा रंग न होता।
प्रभाकर सक्सेना ने यूं कहा कि-जयति जयति गायत्री माता, अखिल विश्व की भाग्य विधाता।
ललतेश कुमार ललित ने कुछ यूं कहा कि – राधा संग खेलें होरी, श्याम श्याम चकोरी। बरसाने की गलियों में देखो, हो रही जोरा जोरी।
ओजस्वी जौहरी ने कहा कि पेड़ सुखा देखकर सारे परिंदे उड़ गए, आज तक लौटा नहीं है एक पंछी डाल पर। उम्र भर जिनको बचाया धूप सर्दी ताप से, छोड़कर तन्हा गए सब आज मेरे हाल पर।
विष्णु आसावा ने पढ़ा कि- ढूंढता हूं फिर वही नाता पुराना चाहिए, मुफलिसी में भी चले वो ही जमाना चाहिए।
वरिष्ठ कवि कामेश पाठक ने कहा कि दिल्ली उत्तम नगर में, मच रही चीख पुकार। खूनी रंग में रंग गया, होली का त्यौहार।
कवि अचिन शर्मा ने मां की महिमा का बखान कर सभी में नई ऊर्जा का संचार किया। कवि कामेश पाठक ने कवि सम्मेलन का संचालन किया।
इस मौके पर परिव्राजक सचिन देव, महेश, अतेंद्र सिंह, जीत सिंह, गौरीशंकर, शिवंवदा सिंह, सीमा गुप्ता, रजनी मिश्रा, पूनम अरोड़ा, गौरी मिश्रा, बृजेश कुमारी, राजेश्वरी, सत्यवती शर्मा, मनोज मिश्रा, वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र प्रजापति आदि मौजूद रहे।














































































