बदायूँ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हुआ मुश्किल, 16 मार्च से सैन्सर युक्त ट्रैक पर देना होगा ड्राइविंग टेस्ट

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बदायूँ। जिले में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीकी और सख्त बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब 16 मार्च से बदायूँ में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों को सैन्सर युक्त आधुनिक ड्राइविंग ट्रैक पर अनिवार्य रूप से ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। इस टेस्ट में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को ही नियमानुसार स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाएगा, जबकि असफल होने वाले आवेदकों को लाइसेंस नहीं मिल सकेगा।
परिवहन विभाग द्वारा जिले में ड्राइविंग ट्रैक टेस्ट और चालन प्रशिक्षण केंद्र का संचालन मैसर्स सिंह रेडियो सर्विस को सौंपा गया है। इसके अंतर्गत बिल्सी रोड स्थित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर सभी तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विभाग के अनुसार 16 मार्च से यहां नियमित रूप से ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को पहले परिवहन कार्यालय बदायूँ में अपनी स्क्रूटनी और बायोमैट्रिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद आवेदकों को आगे की औपचारिकताओं और ड्राइविंग टेस्ट के लिए बिल्सी रोड स्थित चालन प्रशिक्षण केंद्र पर जाना होगा, जहां उन्हें सैन्सर युक्त ड्राइविंग ट्रैक पर वाहन चलाकर अपनी ड्राइविंग क्षमता का प्रदर्शन करना होगा।
यह ड्राइविंग ट्रैक अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर सेंसर लगाए गए हैं। इन सेंसरों के माध्यम से वाहन की गति, दिशा, मोड़ लेने की क्षमता, वाहन नियंत्रण, पार्किंग और अन्य आवश्यक ड्राइविंग कौशल का आकलन किया जाएगा। यदि वाहन निर्धारित लाइन से बाहर जाता है, गलत तरीके से मोड़ लिया जाता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन होता है तो सेंसर तुरंत उसे रिकॉर्ड कर लेते हैं और उसी के आधार पर परिणाम तय होता है।
इस पूरी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप बहुत कम रहेगा, जिससे किसी प्रकार की सिफारिश या पक्षपात की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। परिवहन विभाग का कहना है कि नई प्रणाली लागू होने से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि केवल वही लोग स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे जो वास्तव में वाहन चलाने में सक्षम होंगे। इससे सड़क पर चलने वाले वाहनों के चालकों की गुणवत्ता बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है।
चालन प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों के अनुसार ड्राइविंग ट्रैक पर दोपहिया और चारपहिया दोनों प्रकार के वाहनों के लिए अलग-अलग परीक्षण की व्यवस्था की गई है। अभ्यर्थियों को निर्धारित ट्रैक पर वाहन चलाते हुए मोड़ लेना, रिवर्स करना, पार्किंग करना और अन्य ड्राइविंग कौशल का प्रदर्शन करना होगा। सेंसर आधारित प्रणाली हर गतिविधि को स्वतः रिकॉर्ड करेगी और उसी आधार पर आवेदक के पास या फेल होने का निर्णय लिया जाएगा।
परिवहन विभाग का कहना है कि पहले कई बार बिना पर्याप्त ड्राइविंग कौशल के भी लोगों को लाइसेंस मिल जाते थे, जिससे सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन अब नई तकनीक लागू होने के बाद केवल प्रशिक्षित और योग्य चालक ही ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर पाएंगे।
विभाग ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि जो लोग स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं, वे सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करें और ड्राइविंग टेस्ट के लिए पूरी तैयारी के साथ आएं। अधिकारियों का कहना है कि यह नई व्यवस्था सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि सेंसर आधारित ड्राइविंग टेस्टिंग सिस्टम देश के कई जिलों में पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और अब बदायूँ में इसके लागू होने से लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इससे जिम्मेदार और प्रशिक्षित चालक ही सड़कों पर वाहन चलाते नजर आएंगे, जो सड़क सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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