अन्न का सम्मान और प्रेम का संदेश, एस्सेल में दिखा होली का विशेष परिवेश
उझानी । रंगों, उल्लास और सांस्कृतिक मूल्यों के संग आज एस्सेल स्कूल परिसर में होली का उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नन्हे बच्चों ने अपने सहपाठियों और शिक्षकों के साथ सुरक्षित एवं प्राकृतिक रंगों से होली खेली। पूरा परिसर हंसी, रंग और खुशियों से सराबोर हो उठा, जहां बच्चों की खिलखिलाहट ने त्योहार की असली भावना को जीवंत कर दिया।

इस अवसर पर शिक्षकों ने विद्यार्थियों को होली के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया। बच्चों को बताया गया कि फसल पकने के समय हम सबसे पहले अन्न को भगवान को अर्पित करते हैं, क्योंकि वही ऊर्जा और जीवन के परम स्रोत हैं। अन्न समस्त मानव और जीव जगत के लिए ऊर्जा का आधार है, इसलिए हमें उसका सम्मान करना चाहिए और उसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। इस संदेश के माध्यम से विद्यार्थियों में कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति सम्मान और भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूकता का भाव विकसित किया गया।
होली उत्सव में प्लेग्रुप के विद्यार्थी सान्वी, मिशिका, अंश और हाशिर ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। एलकेजी के अरहम, अथर्व, अग्रिम और कौशिकी ने रंगों के साथ आनंद साझा किया, जबकि यूकेजी के मरियम और ऋषभ यादव ने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ उत्सव का आनंद लिया।
समन्वयक पूजा यादव, रितिका शर्मा और पुष्पा मौर्य ने विद्यार्थियों को होली से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग, पर्यावरण अनुकूल होली मनाने के तरीके तथा आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश विस्तार से समझाया। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण उत्सव मनाने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य विमल सिंह, शिवानी शर्मा, प्रियंका साहू, प्रियंका रोजी, कुसुम, रोशन, सृष्टि, श्वेता, मेघा, आंचल, तथा समस्त शिक्षकों का विशेष सहयोग रहा। सभी शिक्षकों ने बच्चों के साथ रंगों का आनंद लिया और उन्हें त्योहार की सच्ची भावना प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश दिया।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक सुधांशु गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि त्योहार केवल उत्सव नहीं बल्कि संस्कारों को सहेजने का माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रकृति, अन्न और ऊर्जा के स्रोत के प्रति सम्मान रखने तथा सदैव सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
पूरा वातावरण इस बात का साक्षी बना कि जब संस्कार और उत्सव साथ आते हैं, तब शिक्षा सच में जीवंत हो उठती है। बच्चों की मुस्कान और उल्लास ने यह सिद्ध कर दिया कि एस्सेल में त्योहार केवल मनाए नहीं जाते, उन्हें जिया जाता है।













































































