कैंसर में कब और क्यों जरूरी होती है सर्जरी जानिए सही समय और सही इलाज

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बरेली। भारत में पिछले दो दशकों में कैंसर के इलाज में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज कैंसर के उपचार में सर्जरी एक महत्वपूर्ण और प्रभावी विकल्प है, जिसे मरीज की बीमारी की अवस्था और प्रकार के अनुसार अलग-अलग तरीकों से अपनाया जाता है। आम तौर पर सर्जरी तीन स्थितियों में की जाती है पहला, जब यह मुख्य और अंतिम उपचार के रूप में पर्याप्त हो; दूसरा, जब इसे कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के साथ मिलाकर किया जाए; और तीसरा, जब रोग बहुत उन्नत अवस्था में हो और सर्जरी का उद्देश्य लक्षणों से राहत देना हो।

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प्रारंभिक अवस्था के कैंसर में सर्जरी अक्सर निर्णायक उपचार साबित होती है। ऐसे मामलों में केवल ऑपरेशन से ही मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। विशेष रूप से स्क्रीनिंग के माध्यम से शुरुआती चरण में पकड़े गए कैंसर के परिणाम सर्जरी के बाद अत्यंत अच्छे होते हैं। आजकल स्तन, मुखगुहा, गर्भाशय, अंडाशय और कोलन के शुरुआती कैंसर का उपचार लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से किया जा रहा है, जिससे कम रक्तस्राव, कम दर्द और तेजी से रिकवरी संभव होती है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. प्रतीक वार्ष्णेय ने बताया “स्तन, मुख और गर्दन के कैंसर में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी ने न केवल कार्यात्मक बल्कि कॉस्मेटिक परिणामों को भी बेहतर बनाया है। ओरल कैंसर में फ्री फ्लैप सर्जरी से मरीजों की बोलने और खाने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आया है। इसी तरह शुरुआती स्तन कैंसर में ऑनकोप्लास्टिक सर्जरी से बेहतर सौंदर्य परिणाम मिल रहे हैं। पेट से जुड़े शुरुआती कैंसर जैसे कोलन, गर्भाशय और अंडाशय में कीहोल सर्जरी (लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक) ने उपचार के परिणामों को काफी बेहतर किया है। जब कैंसर स्थानीय रूप से उन्नत अवस्था में होता है, तब सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी दी जाती है, ताकि ट्यूमर का आकार कम हो सके और ऑपरेशन संभव हो पाए। इस तरह के संयोजन उपचार से इसोफेगस, पेट, रेक्टम और फेफड़ों के कैंसर में बेहतर परिणाम देखे गए हैं। स्त्री रोग संबंधी कैंसर, विशेषकर अंडाशय के कैंसर में, प्री-ऑपरेटिव कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी/टारगेटेड थेरेपी के माध्यम से ट्यूमर को छोटा कर सर्जरी योग्य बनाया जा सकता है। कुछ मामलों में HIPEC (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) के रूप में सर्जरी और कीमोथेरेपी को एक साथ भी किया जाता है, जिससे पेट के अंदर फैले कैंसर में लाभ मिलता है।“
अत्यधिक उन्नत या मेटास्टेटिक कैंसर में सर्जरी का उद्देश्य रोग को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि मरीज को राहत देना होता है। ऐसे मामलों में भोजन में रुकावट, आंतों में अवरोध या असहनीय दर्द जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए सर्जरी की जाती है। कभी-कभी आंतों के अवरोध को दूर करने के लिए बाईपास सर्जरी करनी पड़ती है। हाल के वर्षों में PIPAC (इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) जैसी एडवांस प्रक्रिया भी उन्नत पेट के कैंसर में सहायक साबित हो रही है।

निष्कर्षतः, कैंसर में सर्जरी की भूमिका मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आधुनिक तकनीक ने उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है, लेकिन अंततः सही निर्णय लेने में सर्जन का अनुभव और विशेषज्ञता ही सबसे महत्वपूर्ण होती है, ताकि हर मरीज को उसकी बीमारी के अनुसार सर्वोत्तम उपचार मिल सके।

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