प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन उत्पीड़न के आरोप, मेडिकल रिपोर्ट को लेकर दावे तेज
प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच मेडिकल जांच को लेकर नए दावे सामने आए हैं। कुछ सूत्रों की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि मेडिकल परीक्षण में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है, हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बताया जा रहा है कि बेली अस्पताल में नाबालिगों की उम्र और कथित यौन उत्पीड़न की जांच कराई गई। रिपोर्ट में उत्पीड़न की पुष्टि का दावा किया जा रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बच्चों की सही उम्र निर्धारित करने के लिए दंत परीक्षण भी कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक सभी जांच रिपोर्ट विवेचना अधिकारी को सौंपी जाएंगी और आगे न्यायालय में प्रस्तुत की जाएंगी, जिसके आधार पर मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
इस प्रकरण में प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। नाबालिगों के संरक्षक के रूप में एक धर्मगुरु के शिष्य ने यह एफआईआर दर्ज कराई है। उधर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। यह याचिका न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
याचिका में कहा गया है कि शंकराचार्य निर्दोष हैं और राजनीतिक दुर्भावना के चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से षडयंत्र रचा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि वे पुलिस जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है और सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं।













































































