मर्यादा के प्रतीक एवं करुणा के सागर थे राम : संत विजय कौशल
शाहजहांपुर। कथा आरंभ होने से पहले एमएलसी डॉ जयपाल सिंह व्यस्त ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा व्यास संत विजय कौशल जी महाराज ने ‘ राम जय राम जय जय राम..’ भजन से कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रभु जिसे बुलाते हैं, वही कथा का श्रवण करने आता है। कथाव्यास ने याज्ञवल्क्य जी के द्वारा भारद्वाज ऋषि के आश्रम में प्रभु श्रीराम की महिमा के बखान के प्रसंग को बड़े ही रोचक ढंग से श्रोताओं के समक्ष रखा। याज्ञवल्क्य ने रामकथा को कलियुग के पापों को हरने वाली तथा भवसागर को पार करने वाली नाव कहा है। उन्होंने राम के नाम को कलयुग में सबसे बड़ा साधन एवं मोक्षदायी बताया है। कथाव्यास के मुख से “हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे..” भजन सुनकर श्रोता भाव विभोर होकर झूमने लगे।

इसके आगे कथा व्यास ने शिव एवं सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान शिव के कहने पर भी सती प्रभु श्री राम को प्रणाम नहीं करती हैं तो भगवान शिव क्षोभित हो जाते हैं। सती प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेने के लिए उनके समक्ष माता सीता का भेष धारण करके जाती हैं, किंतु प्रभु के द्वारा पहचान लिए जाने पर वे लज्जित होती हैं। इसके बाद कथाव्यास ने सुनाया कि सती के पिता दक्ष के द्वारा एक यज्ञ का आयोजन किया जाता है किंतु उसमें भगवान शिव एवं सती को आमंत्रित नहीं किया जाता है। इसके बावजूद भी सती वहां चली जाती हैं। अपना एवं भगवान शिव का अनादर देखकर सती अत्यंत क्रुद्ध होती हैं। क्रोध की अवस्था में वे अपने पिता दक्ष का सिर काट देती हैं एवं स्वयं अग्निकुंड में कूद जाती हैं। प्राणान्त तक वे मन ही मन स्मरण करती हैं कि मुझे हर जन्म में पति के रूप में भगवान शिव ही मिलें। कथा का समापन भजन “श्रीराधेगोपाल भज मन श्री राधे..” से हुआ। मंच संचालन कॉलेज के उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल ने किया। आरती एवं प्रसाद वितरण कथा समापन के बाद अशोक अग्रवाल, श्रीमती कृष्णा अग्रवाल, प्राचार्य प्रो आर के आजाद एवं डॉ आलोक कुमार सिंह ने आरती की। “हे राजा राम तेरी आरती उतारूँ…” की गूंज से पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। प्रसाद वितरण विज्ञान संकाय के सेवानिवृत संकायाध्यक्ष श्री हरीशचंद्र श्रीवास्तव की ओर से हुआ। ये रहे उपस्थित इस पावन अवसर पर शाहजहांपुर के जिलाधिकारी श्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी श्री जयपाल सिंह व्यस्त, जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन श्री डी.पी.एस. राठौर, श्रीमती सोनिया, संजीव बंसल, उपेंद्र पाल, रामचंद्र सिंघल, डॉ जयशंकर ओझा, डॉ मेघना मेहंदीरत्ता, डॉ अमीर सिंह यादव, प्रो मीना शर्मा, प्रो आलोक मिश्र सहित संकुल की समस्त शिक्षण संस्थाओं के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।













































































