ईरान में बिगड़े हालात पर भारत सतर्क, नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह
नई दिल्ली। ईरान में बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में ईरान में करीब नौ हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए भारत सरकार ने दो से तीन एडवाइजरी जारी की हैं, जिनमें भारत में रह रहे लोगों को फिलहाल ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी गई है। वहीं ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से कहा गया है कि वे उपलब्ध साधनों के जरिए सुरक्षित रूप से देश छोड़ने का प्रयास करें।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री ने इस संबंध में ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है और स्थिति पर लगातार करीबी नजर रखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर जरूरी मदद के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अमेरिका द्वारा ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ को लेकर प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्रालय इस पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में भारत और ईरान के बीच कुल 1.6 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात 1.2 बिलियन डॉलर और आयात 0.4 बिलियन डॉलर रहा। वैश्विक व्यापार में ईरान का हिस्सा भारत के कुल व्यापार का मात्र 0.15 प्रतिशत है, इसलिए इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
शक्सगाम घाटी के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि भारत की स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। चाबहार पोर्ट को लेकर उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 28 अक्तूबर 2025 को सशर्त प्रतिबंधों से संबंधित मार्गदर्शन पत्र जारी किया था, जो 26 अप्रैल 2026 तक प्रभावी है और इस व्यवस्था पर भारत अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है।
म्यांमार चुनावों को लेकर विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत निष्पक्ष और समावेशी चुनावों के पक्ष में है, जिसमें सभी हितधारकों की भागीदारी हो। उन्होंने कहा कि म्यांमार में चुनाव के अलग-अलग चरण हो रहे हैं और भारत से वहां गए कुछ लोग निजी यात्रा पर हैं, उनका कोई सरकारी प्रतिनिधित्व नहीं है।
फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के मामलों को भारत में संबंधित प्राधिकरण देखते हैं और विदेश मंत्रालय की इसमें कोई भूमिका नहीं होती। वहीं जापान के विदेश मंत्री के 15 से 17 जनवरी के भारत दौरे पर उन्होंने बताया कि 18वें भारत-जापान रणनीतिक संवाद में सप्लाई चेन, निवेश, व्यापार, तकनीक, रक्षा, नवाचार, सांस्कृतिक सहयोग और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा हुई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर संयुक्त कार्य समूह बनाने का भी निर्णय लिया गया है।
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर जायसवाल ने कहा कि सीसीपी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप मंत्री ने विदेश सचिव से मुलाकात की और बातचीत का विवरण साझा किया गया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान सहित अन्य देशों के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम जारी है।













































































