नीट-पीजी कट-ऑफ घटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

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नई दिल्ली। नीट-पीजी 2025-26 के लिए योग्यता कट-ऑफ प्रतिशत घटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस के खिलाफ दाखिल की गई है, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा की क्वालिफाइंग कट-ऑफ को असामान्य रूप से कम कर दिया गया था। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी द्वारा दाखिल की गई है।

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याचिका में कहा गया है कि नोटिस के जरिए कट-ऑफ को बेहद कम स्तर तक, यहां तक कि शून्य और नकारात्मक अंकों तक घटा दिया गया है, जो मेडिकल शिक्षा के मानकों के विपरीत है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में इसे मनमाना बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि चिकित्सा कोई सामान्य पेशा नहीं है, बल्कि यह सीधे मानव जीवन और गरिमा से जुड़ा क्षेत्र है। केवल खाली सीटें भरने के लिए लिया गया ऐसा निर्णय मेरिट को कमजोर करता है और प्रतियोगी परीक्षा को औपचारिकता में बदल देता है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पीजी स्तर पर मेरिट में की गई यह ढील राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 के प्रावधानों के विपरीत है। उल्लेखनीय है कि एनबीईएमएस ने 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस में नीट-पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को काफी कम कर दिया था, जिसमें आरक्षित वर्ग के लिए इसे माइनस 40 अंक तक निर्धारित किया गया है।

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