बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा के सभागार में मुशायरा बज्म ए सुखन आयोजित हुआ। इसमें बरेली के शायर अमित शर्मा ‘मीत’, मो० लाईक खान ‘फर्रुखाबादी’, मिर्जा मख्दूम बेग और यहीं के डॉ० अनवर वारसी, बदायूं के सुरेंद्र ‘नाज़’ बदायुंनी और यहीं की साक्षी शंखधार ‘श्रीधा’ ने अपने कलाम से श्रोताओं की भावनाओं को झकझोरा। बज्म ए सुखन का आगाज अमित शर्मा ‘मीत’ ने किया और ‘इस मिट्टी को ऐसे खेल खिलाया हमने, खुद को रोज बिगाड़ा रोज बनाया हमने, जो सोचा था वो तो हमसे बना नहीं फिर, जो बन पाया उससे जी बहलाया हमने’ सुनाकर जिंदगी की परेशानियों से वाबस्ता किया। शायरा साक्षी शंखधार ने इश्क मुहब्बत की आवाज उठाई और अपना कलाम ‘मेरी बेपनाह मोहब्बत को दरकिनार कर दिया, किसी ने इश्क़ में दिल को जार‑जार कर दिया, पेश किया। शायर लईक खान ने श्रोताओं को फिर जिंदगी का आइना दिखाया और कलाम ‘जिन्दगी तुझसे बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन तूने भी बहुत तमाशा किया, पढ़ा। शायर सुरेंद्र नाज ने अपने कलाम ‘हथेली पर जो सर रक्खे हुए हैं, वो सब मुझ पर नज़र रक्खे हुए हैं, हमें जैसा भी चाहो रूप दे दो, अभी हम चाक पर रक्खे हुए हैं, सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। डॉ. अनवर वारसी ने अपने कलाम ‘कैसा एलान कर दिया मैंने, सबको हैरान कर दिया मैंने, जिन्दगी मुश्किलों में उलझी थी, मर के आसान कर दिया मैंने’, सुनाकर मुश्किल जिंदगी का रेखाचित्र खींचा। शायर मखदूम बेग बरेलवी ने अपना कलाम ‘जैसी दुनिया में है कलन्दर की, ऐसी किस्मत कहां सिकन्दर की, प्यास को देखकर मिरी मख्दूम, जान मुशकिल में है समन्दर की, सुनाकर फिलासफी से रूबरू कराया। इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चैयरमेन देव मूर्ति , डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. रीता शर्मा मौजूद रहे।